केसीआर की जांच के लिए गठित आयोग से उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हटे
नई दिल्ली, मंगलवार, 16 जुलाई 2024। तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान बिजली क्षेत्र में हुई कथित अनियमितताओं में उनकी भूमिका की छानबीन के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच आयोग से पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल.नरसिम्हा रेड्डी ने मंगलवार को खुद को अलग कर लिया। शीर्ष अदालत को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रेड्डी के वकील ने सूचित किया कि वह आयोग का हिस्सा नहीं बनना चाहते। उच्चतम न्यायालय तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें उन्होंने जांच आयोग के प्रमुख के खिलाफ पक्षपाती होने का आरोप लगाया है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने निवेदन का संज्ञान लिया और कांग्रेस नीत राज्य सरकार को जांच आयोग में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रेड्डी के विकल्प को तलाशने की इजाजत दे दी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता की दलीलों पर गौर किया। राव के वकील ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश ने एक प्रेस वार्ता में बिना किसी जांच के चंद्रशेखर राव के खिलाफ आरोपों के गुण-दोष पर कुछ टिप्पणियां कीं।
शीर्ष अदालत ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री की याचिका का निपटारा कर दिया। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने एक जुलाई को राव को झटका देते हुए उस रिट याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री ने बीआरएस शासन के दौरान बिजली क्षेत्र में कथित अनियमितताओं की छानबीन के लिए जांच आयोग के गठन को अवैध घोषित करने का आग्रह किया था। राव ने जांच आयोग के प्रमुख के तौर पर न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रेड्डी के बने रहने को भी अवैध करार दिए जाने की गुजारिश की थी।
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