शिक्षकों के तबादले पर रोक दिल्ली वालों की जीत : आतिशी

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नई दिल्ली, सोमवार, 08 जुलाई 2024। दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि शिक्षा निदेशालय द्वारा दो जुलाई को एक आदेश के तहत पाँच हज़ार से अधिक शिक्षकों का तबादला कर दिया गया था जिस पर अब रोक लगा दी गई है जो दिल्ली वालों की जीत है। सुश्री आतिशी ने शिक्षकों को बधाई देते हुए आज कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों के शिक्षकों, बच्चों और उनके अभिभावकों का संघर्ष सफल रहा। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आज एक आदेश के माध्यम से दो जुलाई को जारी किए एक ग़लत आदेश के तहत 5000 से ज़्यादा शिक्षकों का तबादला कर दिया गया था लेकिन अब रोक लगा दी गई है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसी शिक्षा क्रांति भाजपा अपने शासित किसी राज्य में नहीं ला पाई है।भाजपा शासित गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश इन सभी राज्यों में सरकारी स्कूल टूटे-फूटे हाल में है जहां ग़रीब से ग़रीब परिवार भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं भेजना चाहते। वही दूसरी तरफ़ अरविंद केजरीवाल सरकार है, जिसके 10 साल की मेहनत की बदौलत आज दिल्ली में सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों से बेहतर है, उनके नतीजे प्राइवेट स्कूलों से बेहतर है। अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में दाख़िला करवा रहे हैं।

शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि, भाजपा से दिल्ली की यह शिक्षा क्रांति हज़म नहीं हुई इसलिए षड्यंत्र रचा कि जो शिक्षक अरविंद केजरीवाल की शिक्षा क्रांति में शामिल है, जो ग़रीब बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं उनका एक बार में तबादला कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि, 11 जून को शिक्षा निदेशालय द्वारा एक आदेश निकाला जाता है। इसमें कहा जाता है कि, कोई भी शिक्षक जो 10 सालों से एक ही स्कूल में पढ़ा रहा है तो उसका अनिवार्य तबादला होगा। यह दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के इतिहास में कभी नहीं हुआ। 28 जून को शिक्षा मंत्री इस बाबत शिक्षा निदेशक को इस ऑर्डर को वापस लेने का निर्देश देती है। फिर एक जुलाई को शिक्षा निदेशक को लिखित रूप से ये आदेश दिया जाता है लेकिन भाजपा दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बेहतर प्रदर्शन की सहन नहीं कर पाती और दो जुलाई को उपराज्यपाल के माध्यम से रातोरात 5000 शिक्षकों का तबादला करवा देती है। यह तबादले सिर्फ़ और सिर्फ़ दिल्ली सरकार के स्कूलों को बर्बाद करने के षड्यंत्र के तहत किए गये थे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि, दिल्लीवालों के इस संघर्ष की बदौलत भाजपा को अपने उपराज्यपाल के माध्यम से इस तबादला आदेश को वापस लेना पड़ा। यह दिल्लीवालों की जीत है।

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