‘नीट’ राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा, प्रधानमंत्री को संसद में जवाब देना चाहिए : तनुज पुनिया

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नई दिल्ली, शनिवार, 29 जून 2024। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने शनिवार को कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितता राष्ट्रीय महत्व का विषय है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संसद में आकर इस बारे में जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह दावा किया कि सरकार इस मामले पर चर्चा से भाग रही है क्योंकि उसे पता है कि चर्चा होने पर उससे जुड़े लोग बेनकाब हो जाएंगे। राहुल गांधी ने सदन में इस विषय को उठाया और राष्ट्रपति के अभिभषण से अलग इस विषय पर चर्चा की मांग की। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सबसे पहले इस पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती है और अलग से किसी विषय पर चर्चा की परंपरा नहीं रही है। नीट के मामले पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से सांसद पुनिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘नीट बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। इससे लाखों परिवार जुड़े हुए हैं। यह बहुत बड़ा घोटाला है। सिर्फ पेपर लीक नहीं हुआ है, बल्कि अंक देने में भी गड़बड़ियां पाई गई हैं। शुरू में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनटीए को क्लीन चिट देने की कोशिश की।’’  उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती? क्या प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री संसद में जवाब नहीं दे सकते? यह देश के लिए उचित नहीं है कि अयोग्य लोग डॉक्टर बन जाएं और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो।’’ कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस मामले में जिस तेज गति से कार्रवाई होनी चाहिए थी वो नहीं हुई। उनका कहना है कि इसलिए विपक्ष चाहता है कि सदन में अलग से चर्चा हो।

पुनिया ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से भाग रही है ताकि उससे जुड़े लोगों की पोल न खुल जाए। उनका कहना है कि अगर नेता प्रतिपक्ष सदन में राष्ट्रीय महत्व का यह मुद्दा उठा रहे हैं तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस पर जवाब दे। पुनिया ने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले पर प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को संसद के अंदर जवाब देना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में पेपर लीक का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा भर्ती की राह देख रहे हैं, लेकिन राज्य की भाजपा सरकार गंभीर नहीं है। पुनिया ने आरोप लगाया कि गिने-चुने विभागों जो भर्तियां हुई भी हैं, उनमें आरक्षण की व्यवस्था को सही ढंग से लागू नहीं किया गया है।

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