फिनोलेक्स मामले में न्यायालय का एनसीएलएटी के न्यायिक, तकनीकी सदस्य को अवमानना ​​​​नोटिस

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नई दिल्ली, बुधवार, 18 अक्टूबर 2023। उच्चतम न्यायालय ने एक असामान्य कदम के तहत बुधवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के न्यायिक सदस्य राकेश कुमार और तकनीकी सदस्य आलोक श्रीवास्तव को नोटिस जारी किया तथा उनसे पूछा कि फिनोलेक्स केबल्स विवाद मामले में शीर्ष अदालत के आदेश की अवहेलना को लेकर उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एनसीएलएटी पीठ द्वारा एक निर्णय पारित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। शीर्ष अदालत ने फिनोलेक्स केबल्स की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से संबंधित एनसीएलएटी पीठ के 13 अक्टूबर के फैसले को इसके गुण-दोष पर विचार किए बिना निरस्त कर दिया। इसने कहा कि मामले की सुनवाई एनसीएलएटी प्रमुख न्यायमूर्ति अशोक भूषण करेंगे।

न्यायालय ने कहा, ‘‘एनसीएलएटी अब सड़न की स्थिति में आ गया है। यह मामला उस सड़न का उदाहरण है। हमारा प्रथम दृष्टया मानना ​​है कि एनसीएलएटी के सदस्य सही तथ्यों का खुलासा करने में विफल रहे हैं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘हमारा विचार है कि यह सुनिश्चित करने के लिए आदेश पारित करना आवश्यक है कि इस अदालत की गरिमा बहाल हो। पक्षों को इस अदालत के आदेशों को टालने के लिए कुटिल तरीकों का सहारा लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’ यह आदेश फिनोलेक्स केबल्स की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) और कंपनी के प्रबंधन नियंत्रण को लेकर प्रकाश छाबड़िया और दीपक छाबड़िया के बीच कानूनी लड़ाई से संबंधित है। उच्चतम न्यायालय द्वारा एनसीएलएटी सदस्यों के खिलाफ अवमानना ​​नोटिस जारी करना दुर्लभ मामला है। न्यायालय ने गत शुक्रवार को एनसीएलएटी अध्यक्ष को इस आरोप पर जांच करने और सोमवार तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था कि उसकी एक पीठ ने शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन किए बिना आदेश दिया।

शीर्ष अदालत की प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने उस दिन एनसीएलएटी को इसके फैसले पर आगे बढ़ने और जांचकर्ता की रिपोर्ट मिलने के बाद ही बैठक के नतीजे घोषित करने का निर्देश दिया था। न्यायालय का आदेश दोपहर 1.55 बजे डाला गया और वकील ने एनसीएलएटी पीठ को भी घटनाक्रम की जानकारी दी, जो अपराह्न दो बजे फैसला सुनाने वाली थी। हालांकि, एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ आगे बढ़ गई और आदेश सुनाया, जबकि जांचकर्ता की रिपोर्ट दोपहर 2:40 बजे डाली गई थी।

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