पश्चिम बंगाल : मंत्री फिरहाद हकीम और टीएमसी विधायक मदन मित्रा के आवास पर सीबीआई के छापे
नई दिल्ली, रविवार, 08 अक्टूबर 2023। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल में नागरिक निकायों द्वारा की गई भर्तियों में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जांच के सिलसिले में रविवार सुबह कोलकाता में राज्य सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक मदन मित्रा के आवास सहित 12 जगहों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के मंत्री हकीम कोलकाता के महापौर भी हैं। वह तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी संगठन में अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सीबीआई अधिकारियों की एक टीम केंद्रीय बलों की एक बड़ी टुकड़ी के साथ दक्षिण कोलकाता के चेतला इलाके में हकीम के आवास पर पहुंची।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘सीबीआई के दो अधिकारी हकीम से पूछताछ कर रहे हैं।’’ सीबीआई टीम ने जैसे ही छापेमारी शुरू की, हकीम के समर्थक उनके आवास के बाहर जमा हो गए और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। सीबीआई के एक दल ने पूर्व मंत्री और उत्तर 24 परगना जिले के कमरहाटी से विधायक मित्रा के भवानीपुर इलाके में स्थित आवास पर भी छापेमारी की। मित्रा का घर चेतला में हकीम के आवास से करीब तीन किलोमीटर दूर है।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया, ”सीबीआई ने एक मामले की जारी जांच के सिलसिले में आज (रविवार) कोलकाता, कांचरापाड़ा, बैरकपुर, हलिसहर, दमदम, उत्तरी दमदम, कृष्णानगर, ताकी, कमरहाटी, चेतला, भवानीपुर सहित करीब 12 जगहों पर छापेमारी की। यह छापेमारी लोकसेवकों सहित कुछ लोगों के परिसरों पर की गई।”
अधिकारियों ने नयी दिल्ली में बताया कि अभियान में हकीम और मित्रा के दो-दो परिसरों पर छापेमारी की जा रही है। छापेमारी की कार्रवाई पर हमला बोलते हुए टीएमसी ने कहा कि यह केन्द्रीय निधि की मांग को लेकर राजभवन के बाहर जारी पार्टी के प्रदर्शन से ध्यान हटाने का प्रयास है। टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने कहा, ‘‘यह अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में राजभवन के बाहर जारी विरोध प्रदर्शन से जनता का ध्यान हटाने का एक प्रयास है। लगता है कि भाजपा बढ़ते हुए सार्वजनिक असंतोष को भांप रही है, और वे विमर्श को बदलने के लिए हरसंभव तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह प्रतिशोध की राजनीति का एक स्पष्ट उदाहरण है।’’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘अगर तृणमूल के पास कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है, तो वह ईडी और सीबीआई से क्यों भयभीत है।’’ भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘जब भी तृणमूल के नेताओं को ईडी और सीबीआई तलब करती है वे रोना रोते हैं और एजेंसियों के राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाते रहते हैं। फिर भी वास्तविकता यही है कि तृणमूल भ्रष्टाचार में लिप्त है और पार्टी का लगभग हर नेता किसी न किसी आरोप का सामना कर रहा है।’’
हकीम और मित्रा दोनों को नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में सीबीआई ने 2021 में गिरफ्तार किया था। मित्रा को शारदा चिट फंड घोटला मामले में सीबीआई 2014 में भी गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले, बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले की जांच के सिलसिले में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रथिन घोष के आवास सहित कई स्थानों की तलाशी ली थी। केंद्रीय जांच एजेंसियों का आरोप है कि 2014 से 2018 के बीच राज्य के विभिन्न नागरिक निकायों ने पैसों के बदले में लगभग 1,500 लोगों को अवैध रूप से नियुक्त किया था।
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