एशिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ भोपाल में

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नई दिल्ली, बुधवार, 26 जुलाई 2023। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अगस्त के प्रथम सप्ताह में मध्यप्रदेश के भोपाल में एशिया के सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ''उन्मेष'' का उद्घाटन करेंगी। साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने आज यहां बताया कि ''उन्मेष'' का आयोजन भोपाल में तीन अगस्त से छह अगस्त तक किया जा रहा है। इस बारे इस अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के साथ ही संगीत नाटक अकादेमी द्वारा ''उन्मेष'' शीर्षक से लोक एवं जनजातीय प्रदर्शन कलाओं का राष्ट्रीय उत्सव भी आयोजित किया जा रहा है। इन दोनों समारोहों का उद्घाटन श्रीमती मुर्मु करेंगी। आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित हो रहे इस उत्सव को साहित्य अकादमी, और मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग, संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं।

साहित्य उत्सव में केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बिस्वा भूषण हरिचंदन, तेलंगाना की राज्यपाल तामिलिसाई सौंदराराजन, फिजी के भारत में राजदूत कमलेश शशि प्रकाश तथा वरिष्ठ साहित्यकार एस.एल. भऐरपा, शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, वी. कामकोटि, चंद्रशेखर कंबार, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, गौतम घोष, संजय रॉय, जयंत महापात्र, ऑस्कर पुयोल, तुलसी दिवस, एम.ए. आलवार, सुरेश गोयल, गिरीश्वर मिश्र, चित्रा दिवाकारुणी, विष्णु दत्त राकेश, रमेश पोखरियाल ''निशंक'', लिंडा हेस, मामि यामदा, अमीश त्रिपाठी, सोनल मानसिंह, चित्रा मुद्गल, रघुवीर चौधरी, विनय सहस्रबुद्धे, ममता कालिया, महेश दत्तानी, वामन केंद्रे, प्रयाग शुक्ल, सुरजीत पातर, नवतेज सरना, विश्वास पाटिल, नमिता गोखले, महेंद्र कुमार मिश्र, शीन काफ़ निज़ाम, वासमल्ली के. अरुण कमल, गोविंद मिश्र, लीलाधर जगूड़ी और उषा किरण खान आदि भी शामिल होगीं।

अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ''उन्मेष'' के 75 से अधिक कार्यक्रमों में लगभग 100 भाषाओं के 575 से अधिक लेखक सहभागिता कर रहे हैं। भारत के अतिरिक्त 13 अन्य देशों के लेखक भी उत्सव में शामिल होंगे। ''उन्मेष'' का यह दूसरा संस्करण है। पहला आयोजन गत वर्ष जून में शिमला में आयोजित किया गया था। इस अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव में, कविता और कहानी पाठ के अलावा, भारतीय काव्यशास्त्र, भारतीय भक्ति साहित्य, सागर साहित्य, भारत की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय नाटकों में अलगाव का सिद्धांत, विविधता में एकता, भारत की सौम्य शक्ति, सिनेमा और साहित्य, विदेशी भाषाओं में भारतीय साहित्य का प्रचार-प्रसार, चिकित्सकों का साहित्य, साहित्य एवं प्रकृति, मशीनों का उदय - लेखकविहीन साहित्य, रचनात्मकता बढ़ाने वाली शिक्षा, अनुवाद, प्रगति का संचालक और आलोचनात्मक विचार, योग साहित्य, मातृभाषाओं का महत्त्व, फंतासी और विज्ञान कथा साहित्य, ई-साहित्य, नारीवाद और साहित्य, आदिवासी लेखन और हाशिये का स्वर - उत्पीड़ितों का उत्थान जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर परिचर्चा और विचार-विमर्श होगा।

 

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