'शहीद दिवस' पर सुरक्षा नहीं मिलने पर उमर पैदल कार्यालय पहुंचे

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श्रीनगर, गुरुवार, 13 जुलाई 2023। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को कथित तौर पर सुरक्षा नहीं मुहैया कराये जाने पर गुरुवार को वह श्रीनगर में अपने कार्यालय पैदल ही गये। एक ट्वीट में श्री उमर ने कहा कि पार्टी के कई नेताओं को पुलिस ने श्रीनगर में कार्यालय आने से भी रोका। नेशनल कॉफ्रेंस कश्मीर में ''शहीद दिवस'' मनाने के लिए अपने मुख्यालय में एक समारोह आयोजित किया है। जिसमें पार्टी उन 22 कश्मीरी लोगों को श्रद्धांजलि देगी जो कि 1931 में इसी दिन डोगरा शासक की सेना द्वारा मारे गए थे।

जम्मू-कश्मीर 13 जुलाई को राजकीय अवकाश के रूप में ''शहीद दिवस'' मनाता था और हर वर्ष इस दिन एक भव्य आधिकारिक समारोह आयोजित किया जाता था, जहां मुख्यमंत्री या राज्यपाल मुख्य अतिथि होते थे। पांच अगस्त 2019 को हालाँकि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 2020 से इस दिन को राजपत्रित छुट्टियों की सूची से हटा दिया। पूर्व मुख्यमंत्री उमर ने कहा कि वह गुपकर आवास से अपने कार्यालय पैदल पहुंचे, क्योंकि उन्हें सुरक्षा देने से इनकार कर दिया गया था।

उमर ने एक वीडियो पोस्ट कर ट्वीट किया, ''प्रिय जम्मू-कश्मीर पुलिस, यह मत सोचिए कि मुझे मेरे एस्कॉर्ट वाहन और आईटीबीपी कवर देने से इनकार करने से मैं रुक जाऊंगा। मुझे जहां जाना है वहां तक पैदल चलूंगा और अब मैं बस यही कर रहा हूं। उन्होंने कहा, ''अब जब मैं कार्यालय पहुंच गया हूं और अपने कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ूंगा। सच तो यह है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मेरे कई वरिष्ठ सहयोगियों को उनके घरों में ही रोकने की रणनीति अपनाकर आज नेशनल कांफ्रेंस के कार्यालय में आने से रोक दिया है। रोके गए पार्टी कार्यकताआें में अब्दुल रहीम राथर, अली एम सागर_ एसबी, अली मोहम्मद दार और अन्य है।

नेशनल कॉफ्रेंस के प्रवक्ता ने कहा कि श्री उमर पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद, उन्होंने अपने घर से नवाई सुभ कार्यालय तक पैदल जाने का विकल्प चुना। उन्होंने कहा, ''जेकेएनसी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद, उन्हें सुरक्षा वाहन और आईटीबीपी कवर से वंचित कर दिया, उन्होंने अपने घर से नवाई सुभ कार्यालय तक पैदल चलने का फैसला किया। उनका उद्देश्य उन पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करना था जो वहां 1931 में शहीद हुए कश्मीरियों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए थे।

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