विकलांगता प्रमाणपत्र को चुनौती देने वाली चिकित्सा अभ्यर्थी की अर्जी पर केंद्र से जवाब तलब

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नई दिल्ली, रविवार, 25 दिसम्बर 2022। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मेडिकल अभ्यर्थी की अर्जी पर केंद्र तथा राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से जवाब मांगा है। इस विद्यार्थी ने लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा उसे शत-प्रतिशत विकलांग करार दिये जाने वाले प्रमाण पत्र को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता के अनुसार चलने-फिरने में उसकी 60 फीसदी विकलांगता है, लेकिन शत-प्रतिशत तक उसे विकलांग बताने वाला आकलन खासकर तब समझ से परे है ‘‘जब विकलांगता बोर्ड ने खुद ही कहा है कि याचिकाकर्ता किसी सहायता उपकरण का इस्तेमाल नहीं कर रहा है।’’ न्यायमूर्ति विकास महाजन ने केंद्र, एनएमसी, चिकित्सा परामर्श समिति (एमसीसी), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय तथा विकलांग सशक्तीकरण विभाग को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।

अदालत ने कहा कि जवाबी हलफनामे चार सप्ताह के भीतर दाखिल किये जाएं। उसने अगली सुनवाई के लिए 27 फरवरी की तिथि मुकर्रर की। याचिकाकर्ता उस्मान ने कहा कि उसने नीट-यूजी, 2022 परीक्षा दी और उसमें उत्तीर्ण होने के बाद वह एनएमसी के सांविधिक नियमों के अनुरूप अपने (विकलांगता) आकलन के लिए डीजीएचएस द्वारा गठित विकलांगता बोर्ड के पास गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मामले में निर्धारित चिकित्सा आकलन बोर्ड लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध अस्पताल था और इस बोर्ड ने आठ अक्टूबर को उसे शत-प्रतिशत विकलांग करार दिया था।

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