प्रधान न्यायाधीश ने न्यायालय परिसर के सुलभता ऑडिट के लिए समिति गठित की

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नई दिल्ली, गुरुवार, 22 दिसम्बर 2022। उच्चतम न्यायालय परिसर को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने के लिए उसकी ‘भौतिक और कार्यात्मक पहुंच’ का ऑडिट करने के वास्ते प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। ‘सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन एक्सेसिबिलिटी’ (सुलभता पर शीर्ष अदालत की समिति) को न्यायालय परिसर में दिव्यांगों के सामने पेश आने वाली दिक्कतों का पता लगाने के लिए एक प्रश्नावली तैयार करने और जारी करने का व्यापक अधिकार दिया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर 19 दिसंबर को जारी नोटिस के मुताबिक, समिति सुलभता ऑडिट, दिव्यांगों पर की गई रायशुमारी और भौतिक एवं कार्यात्मक पहुंच से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के उपायों/सिफारिशों पर एक रिपोर्ट तैयार करेगी। नोटिस में कहा गया है, “भारत के प्रधान न्यायाधीश ने देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की अध्यक्षता में न्यायालय परिसर तक भौतिक एवं कार्यात्मक पहुंच का ऑडिट करने के लिए ‘सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन एक्सेसिबिलिटी’ नामक समिति का गठन किया है।”

इसमें बताया गया है कि समिति के अन्य सदस्यों में बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. संजय जैन, शीर्ष अदालत द्वारा नामित लाइब्रेरियन शक्ति मिश्रा, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा नामित अधिवक्ता वी श्रीधर रेड्डी और सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज (एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ) द्वारा नामित स्वतंत्र सुलभता विशेषज्ञ निलेश सिंगित शामिल हैं। नोटिस के मुताबिक, उच्चतम न्यायालय के अतिरिक्त रजिस्ट्रार अजय अग्रवाल समिति के सदस्य (सचिव) हैं। इसमें कहा गया है कि समिति शीर्ष अदालत परिसर और उसकी कार्य प्रणाली का सुलभता ऑडिट करेगी, जिसमें भौतिक के साथ-साथ तकनीकी पहुंच भी शामिल है।

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