अमृतकाल महोत्सव : गहलोत मानगढ़ में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे

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जयपुर, रविवार, 30 अक्टूबर 2022। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक नवंबर को मानगढ़ में आजादी के अमृतकाल महोत्सव के तहत आयोजित होने वाले शहीदों के लिए श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी एक नवंबर को मानगढ़ आने का कार्यक्रम है। राजस्थान सीमा से सटे गुजरात और मध्यप्रदेश के साथ-साथ राज्य के जनजाति बाहुल्य जिलों की जनजातीयों को लुभाने के लिये प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को अहम माना जा रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम का असर गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी होगा। राजस्थान के अलावा अगले साल इन दोनों राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार गहलोत एक नवंबर को सुबह 9.30 बजे विशेष विमान से बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम पहुंचेंगे। गहलोत गुजरात दौरे पर हैं और 31 अक्टूबर को उनके राजस्थान आने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री जयपुर से 31 अक्टूबर को रात साढ़े आठ बजे विशेष विमान से उदयपुर के लिये रवाना होंगे। उदयपुर से एक नवंबर को सुबह पोने नौ बजे हेलीकॉप्टर से मानगढ़ जाने का कार्यक्रम है। मानगढ़ में होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के शामिल होने की संभावना है।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानगढ़ धाम के लिये कुछ बड़ी घोषणा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग कर चुके हैं। गहलोत ने प्रधानमंत्री को दो बार पत्र लिखकर मांग की है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया जाए ताकि महान संत गोविंद गुरु को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके। राजस्थान में आठ जिले बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, सिरोही, प्रतापगढ़ और पाली इस क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। यहां कुल 37 विधानसभा क्षेत्र हैं। 37 में से 21 सीट भाजपा के पास हैं, जबकि कांग्रेस के पास 11, तीन सीट पर निर्दलीय काबिज हैं और भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के पास दो सीट हैं। राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीट है और इनमें से 71 पर भाजपा का कब्जा है। राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में बीटीपी का प्रभाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चिंता का विषय है, इसलिए दोनों प्रमुख दल जनजातीय वोट बैंक को अपने पास रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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