चांदी का चम्मच लेकर जन्मे लेकिन मेहनत के दम पर हासिल किया मुकाम- तेजस्वी यादव
पटना, बुधवार, 10 अगस्त 2022। सात साल पहले पहली बार विधायक बने तेजस्वी प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक शानदार शुरुआत की थी लेकिन उसके बाद उनके राजनीतिक सितारे गर्दिश की ओर जा ही रहे थे कि फिर एक बार किस्मत ने पलटी मारी और अब वह उपमुख्यमंत्री बन कर ‘‘किंगमेकर’’ की भूमिका में बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं । करिश्माई नेता लालू प्रसाद के 33 वर्षीय छोटे पुत्र ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की चुनावी कमान संभाली और प्रभावी प्रदर्शन किया।
राजद ने इस चुनाव में करीबी मुकाबले में ने 75 सीटें जीतकर अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और सबसे बड़े दल का तमगा हासिल किया। वह भी ऐसी परिस्थिति में जब पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद जेल में थे और उनके उत्तराधिकारी में स्पष्ट रूप से कौशल की कमी दिख रही थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा तेजस्वी को दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले के पहले, वह एक सशक्त विपक्ष के नेता के रूप में प्रभाव छोड़ रहे थे और अपने पिता के कट्टर प्रतिद्वंद्वी के नेतृत्व वाली सरकार को वह विधानसभा से लेकर सड़क पर चुनौती दे रहे थे।
नाटकीय तरीके से जनता दल यूनाईटेड और राजद के बीच गठबंधन से ठीक पहले राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी ने कांग्रेस और वाम दलों के साथ मिलकर केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार के खिलाफ व्यापक प्रतिरोध मार्च निकाला था और स्पष्ट संकेत दिया था कि राज्य में विपक्ष के पास संघर्ष की भूख अभी है। नौ नवंबर, 1989 को जन्मे तेजस्वी लालू और राबड़ी देवी के नौ बच्चों में सबसे छोटे हैं और वह अपने पिता के सबसे चहेते भी हैं। लालू ने संभवत: छोटी सी उम्र में ही तेजस्वी की राजनीतिक क्षमता को पहचान लिया था।
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