आरबीआई वित्तीय स्थिरता की रक्षा करते हुए नवप्रवर्तनों को स्थान देने को तैयार: शक्तिकांत दास
मुंबई, शुक्रवार, 22 जुलाई 2022। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर डॉ शक्तिकांत दास ने कहा है कि इस समय भू-राजनैतिक अस्थिरता और गंभीर वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। दास ने शुक्रवार को कहा कि आरबीआई के वित्तीय स्थिरता की रक्षा करते हुए ऐसा अनुकूल नियामकीय वातावरण तैयार करने को प्रतिबद्ध है जिसमें स्वस्थ तरीके से नये परिवर्तनकारी नवप्रवर्तनों को समाहित किया जा सके। आरबीआई गवर्नर ने कहा, ''इतिहास दर्शाता है कि जब प्रौद्योगिकी, बाजार के प्रतिभागी और नियामकीय संस्थाएं मिलकर काम करते हैं तो उससे क्रांतिकारी नवप्रवर्तन होते हैं और आर्थिक वृद्धि तेज होती है। मुझे उम्मीद है कि हमारे बैंक आने वाले दिनों में इसको सही सिद्ध करेंगे।
दास मुंबई में बैंक ऑफ बड़ौदा वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बैंकिंग, व्यवसाय और अधिक सहयोग मूलक होने के साथ-साथ पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी होगा, जिसमें नयी प्रवेश करने वाली इकाइयां नए-नए नवप्रवर्तनकारी उत्पाद लेकर आएंगी। वर्तमान बैंकों को इस सतत परिवर्तनशील वातावरण के लिए तैयार रहना होगा और साथ ही उन्हें कारोबार के उपयुक्त मॉडल स्वस्थ विकास, स्थिरता और ग्राहकों के संतोष पर ध्यान केंद्रित रखना होगा।
दास ने कहा,'इससे भी महत्वपूर्ण कंपनी के संचालन की अच्छी नीति है। अच्छा संचालन सफलता का मूल आधार होता है और इससे समझौता नहीं किया जाना चाहिए। आरबीआई गवर्नर ने बैंकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपयुक्त प्रबंध बनाए रखने का सुझाव देते हुए कहा, हितधारकों को डिजिटल धोखाधड़ी, डाटा चोरी और साइबर अपराधों से बचाने के उपयुक्त इंतजाम रखे जाने चाहिए। अंततः बैंकिंग एक सेवा है और इसमें ग्राहकों के हित की अधिक से अधिक सुरक्षा तथा सुविधा को उपयुक्त प्राथमिकता देना आवश्यक है।
अर्थव्यवस्था के हालात के बारे में उन्होंने कहा, आज हम अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं। यूरोप में चल रही लड़ाई और महामारी ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बहुत अनिश्चितता पैदा कर दी है। देशों में मुद्रास्फीति, जिसमें खाद्य मुद्रास्फीति भी शामिल है अप्रत्याक्षित रूप से बहुत ऊंची चल रही है। आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हैं। माल और श्रम बाजार में मांग एवं पूर्ति में अंतर बढ़ा है।'डॉ दास ने कहा कि आज दुनियाभर में केंद्रीय बैंक जिस तरह तेजी से अपनी मौद्रिक नीतियों में शक्ति ला रहे हैं। उससे निकट भविष्य में मंदी का खतरा बढ़ रहा है। जिंसों की कीमतें जून के मुकाबले कम हुयी हैं लेकिन अब भी वे ऊंचे स्तर पर बनी हुयी हैं। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों के और अधिक ऊंचा होने के साथ-साथ वैश्विक निवेशकों द्वारा जोखिम से दूर हटने के कारण सुरक्षित संपत्तियों में निवेश की मांग बढ़ी है और इसके परिणाम स्वरूप अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले न केवल भारत जैसे उभरते बाजार वाली अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं बल्कि कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुयी हैं।
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