केरल विस में यूडीएफ के हंगामे के कारण कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

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तिरुवनंतपुरम, सोमवार, 27 जून 2022। केरल विधानसभा की कार्यवाही को विपक्ष के हंगामे की वजह से सोमवार को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ)-नीत विपक्ष के सदस्य कथित तौर पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ताओं द्वारा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के वायनाड स्थित दफ्तर में तोड़फोड़ करने के सिलसिले में दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। सुबह नौ बजे प्रश्नकाल कुछ मिनट ही चला था कि सदन की कार्यवाही को हंगामे के चलते स्थगित करना पड़ा। इसके बाद विपक्षी सदस्यों की नारेबाज़ी के बीच सदन की कार्यवाही सुबह 10 बजे फिर शुरू हुई। इस दौरान कुछ सदस्यों ने काले रंग की कमीज़ पहनी हुई थी और वे राहुल गांधी के कार्यालय में तोड़फोड़ के विरुद्ध और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ सोना तस्करी से जुड़े आरोपों को लेकर तख्तियां और बैनर पकड़े हुए थे।

विधानसभा अध्यक्ष एम. बी. राजेश जब एम.पी. गोविंदन नायर, के. शंकर नारायण, के. कुंजीकृष्ण पिल्लै, एस. त्यागराजन और पी. गोपालकृष्णन समेत आठ पूर्व विधायकों के निधन को लेकर शोक संदेश पढ़ रहे थे तब विपक्षी सदस्य कुछ देर के लिए खामोश रहे। इन पूर्व विधायकों का हाल में निधन हुआ है। शोक संदेश के पूरा होते ही, प्रदर्शनकारी विधायक सदन में आसन के निकट आ गए और तख्तियां तथा बैनर लहराने लगे एवं राहुल गांधी के दफ्तर में तोड़फोड़ को लेकर मुख्यमंत्री से माफी और एसएफआई के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाज़ी करने लगे। आरोप है कि एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने हाल में वायनाड के कांग्रेस सांसद के स्थानीय कार्यालय में तोड़फोड़ की थी।

विपक्ष के सदस्यों ने अपनी नारेबाज़ी अध्यक्ष के यह कहने के बावजूद बंद नहीं की कि वह कांग्रेस विधायक टी सिद्दीकी की ओर से दिए गए नोटिस पर चर्चा कराएंगे। इसके बाद लगातार हो रहे विरोध के बीच अध्यक्ष ने मंत्रियों को विभिन्न विधानसभा समितियों की रिपोर्ट पटल पर रखने की इजाजत दे दी और सदन की कार्यवाही सुबह 10 बजकर 24 मिनट पर दिनभर के लिए स्थगित कर दी। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह फिर शुरू होगी। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद, विपक्षी सदस्य तख्तियां और काले रंग के बैनर लहराते हुए विधानसभा से बाहर चले गए। विपक्षी विधायकों ने गांधी के दफ्तर में तोड़फोड़ को ‘बर्बर’ करार दिया है।

विधानसभा के द्वार के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि यूडीएफ ने गांधी के कार्यालय पर हुए हमले पर चर्चा करने के लिए नोटिस दिया था और सदन में इसी को लेकर नारेबाज़ी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश की और नारे लगाए, जो भड़काऊ थे, जिससे सदन की कार्यवाही में और बाधा आई। सतीशन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद के दफ्तर पर हमले की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को थी और राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज के स्टाफ के पूर्व सदस्य के नेतृत्व में हमला किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जॉर्ज के स्टाफ के पूर्व सदस्य को गांधी के कार्यालय में तोड़फोड़ को लेकर दर्ज मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। सतीशन ने यह भी आरोप लगाया कि हमला संघ परिवार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी को खुश करने के लिए किया गया है, ताकि सोना तस्करी मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की तफ्तीश से बचा जा सके। इस मामले में मुख्यमंत्री पर आरोप हैं। इससे पहले सदन में प्रश्नकाल सुबह नौ बजे जैसे ही शुरू हुआ, विपक्ष ने मेज थपथपाना शुरू कर दिया और फिर जैसे ही पहले सवाल का जवाब दिया जाने लगा, विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी।

विधानसभा अध्यक्ष राजेश ने उनसे प्रश्नकाल को बाधित न करने का आग्रह किया, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने उनकी बात नहीं मानी। अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से बैठने और तख्तियां तथा बैनर न लहराने को भी कहा, क्योंकि यह सदन के नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि वह विपक्ष के कार्य स्थगन के नोटिस पर विचार करेंगे, लेकिन विपक्षी सदस्य ‘‘एसएफआई की गुंडागर्दी’’ जैसे नारे लगाते रहे। इसके बाद उनके और एलडीएफ के विधायकों के बीच बहस शुरू हो गई। इसके बाद सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के विधायकों ने भी नारेबाज़ी शुरू की और विजयन के नेतृत्व की सराहना की। सदन में हंगामा थमते न देख अध्यक्ष ने कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी।

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