मुश्ताक लत्राम को सरकार ने यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया

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नई दिल्ली, गुरुवार, 14 अप्रैल 2022। सरकार ने मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ ‘मुश्ताक लत्राम’ को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत ‘‘आंतकवादी’’ घोषित कर दिया है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी। कड़े आतंकवाद रोधी कानून यूएपीए के तहत उसे आतंकवादी घोषित करने से सुरक्षा एजेंसियों को अपराध की आय से खरीदी गई उसकी या उसके सहयोगियों की सम्पत्तियों को कुर्क करने का अधिकार मिल गया है। इसके साथ ही, उसके सम्पर्क में रहने वाला हरेक व्यक्ति इस कानून के तहत अपराधी माना जाएगा।

जरगर ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) से अलग होकर अल-उमर-मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन का गठन किया था। वह, 1999 में ‘इंडियन एयरलाइंस’ के विमान आईसी-814 के अपहरण के बाद बंधक बनाए गए उसके यात्रियों एवं चालक दल के सदस्यों के बदले रिहा किए गए आतंकवादियों में से एक था। जरगर के अलावा, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर और ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के लिए काम कर रहे अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या करने वाले शेख उमर को भी बंधकों के बदले रिहा किया गया था। केन्द्र सरकार द्वारा पिछले एक सप्ताह में आतंकवादी घोषित किया गया जरगर चौथा व्यक्ति है। सरकार अभी तक 35 लोगों को आतंकवादी घोषित कर चुकी है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना के अनुसार, 52 वर्षीय जरगर उर्फ लत्राम श्रीनगर के नौहट्टा से है और आतंकवादी संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन का संस्थापक एवं मुख्य कमांडर है। वह जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से संबद्ध है।

जरगर अभी पाकिस्तान में है। वह 1980 के दशक के अंत में हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेने पाकिस्तान गया था। गृह मंत्रालय ने कहा कि जरगर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान की ओर से लगातार अभियान चला रहा है। मंत्रालय ने कहा कि वह हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, आतंकवादी हमलों की साजिश रचने, उनको अंजाम देने और आतंकवाद के वित्त पोषण सहित विभिन्न आतंकवादी कृत्यों में शामिल रहा है। गृह मंत्रालय ने कहा कि अल-कायदा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे कट्टरपंथी आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने के कारण जरगर न केवल भारत के लिए बल्कि दुनियाभर की शांति के लिए खतरा है। केन्द्र सरकार का मानना है कि जरगर उर्फ लत्राम आतंकवाद में शामिल है। अधिसूचना में कहा गया, ‘‘ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 35 की उप-धारा (1) के खंड (ए) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्र सरकार इस व्यक्ति को चौथी अनुसूची में डालती है।’’

इससे पहले सरकार ने आठ अप्रैल को, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के सरगना और 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के ‘मास्टरमाइंड’ हाफिज सईद के बेटे हाफिज तल्हा सईद को भी आतंकवादी घोषित किया था। इसके बाद 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की बस पर हुए आतंकवादी हमले में शामिल पाकिस्तानी नागरिक मोहिउद्दीन औरंगजेब आलमगीर को 11 अप्रैल को आतंकवादी घोषित किया गया था। वहीं, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले में शामिल पाकिस्तानी नागरिक अली काशिफ जान को 12 अप्रैल को सरकार ने आतंकवादी घोषित किया था। यह अधिनियम केन्द्र सरकार को यह अधिकार देता है कि यदि उसे लगता है कि कोई आतंकवाद में शामिल है, तो वह उसके नाम को अधिनियम की चौथी अनुसूची में डाल सकती है।

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