10 अप्रैल को है रामनवमी
- जानिए शुभ मूहुर्त, पूजा विधि और श्री राम की जन्म कथा
आप सभी जानते ही होंगे हिंदू धर्म में श्री राम का खास महत्व होता है। जी हाँ और इस वक्त नवरात्रि चल रहे हैं और बहुत जल्द रामनवमी का पर्व आने वाला हैं। ऐसे में देश के हर राज्य में इस त्योहार को मनाया जाता है, हालाँकि रामजन्म भूमि अयोध्या में इस दिन एक अलग ही नाजारा देखने को मिलता है। आप सभी को बता दें कि इस बार राम नवमी पर रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रवि योग का त्रिवेणी संयोग बन रहा है। अब हम आपको बताते हैं नवमी की पूजा विधि, मुहूर्त, कथा के बारे में।
श्री राम जन्मकथा- महाकाव्य रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियां थीं, लेकिन उन्हें काफी सालों तक संतान नहीं हुई थी। फिर ऋषि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ कराने का सलाह दी। ऋषि की सलाह पर राजा दशरथ ने श्रृंगी ऋषि से ये यज्ञ संपन्न कराया। इसके समाप्ति के बाद महर्षि ने दशरथ की तीनों पत्नियों को एक-एक कटोरी खीर खाने को दी और कुछ महीनों बाद ही तीनों रानियां गर्भवती हो गई। इन तीनों रानियों में से रानी कौशल्या ने भगवान श्री राम को जन्म दिया। बताया जाता है कि उनका जन्म रावण को खत्म करने के लिए ही हुआ था। ऐसा भी कहते है कि नवमी के दिन ही स्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना शुरू की थी।
राम नवमी की पूजा विधि - इस दिन सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। उसके बाद हाथ में अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें और प्रभु श्री राम का पूजा करें। अब पूजा में गंगाजल, फूल, 5 प्रकार के फल, मिष्ठान आदि जरूर चढाएं। ध्यान रहे भगवान राम को तुलसी का पत्ता और कमल का फूल जरूर अर्पित करें। जी हाँ और पूजन करने के बाद अपनी इच्छानुसार रामचरितमानस, रामायण या रामरक्षास्तोत्र का पाठ करें।
राम नवमी 2022 शुभ मुहूर्त - चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का प्रारंभ: 10 अप्रैल, दिन रविवार, 01:22 AM पर।। चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का समापन: 11 अप्रैल, दिन सोमवार, 03:16 AM पर।।
राम जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्त: दिन में 11:06 बजे से दोपहर 01:39 बजे तक।।दिन का शुभ समय: दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक।
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