राज्यसभा में पांच वर्षाें में 35 फीसदी समय नष्ट हो गया: नायडु

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नई दिल्ली, गुरुवार, 31 मार्च 2022। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडु ने आज कहा कि पिछले पांच वर्षाें में सदन का 35 फीसदी समय नष्ट हो गया है और इस दौरान एक मात्र सदस्य एस आर बालासुब्रमणियन की पूरी उपस्थिति रही है। सदन का छह वर्षाें का कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्त हो रहे 72 सदस्यों को श्री नायडु के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में आज सदन ने भावभीनी विदायी दी। सदन में उनके योगदान का याद किया तथा उनके मंगल भविष्य की कामना की।

सेवा निवृत हो रहे सदस्यों में 65 सदस्य 19 राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जबकि सात सदस्य मनोनित थे। इन सदस्यों में श्रीमति निर्मला सीतारमण, श्री पीयूष गोयल, श्री ए के एंटनी, अंबिका सोनी, पी चिदंबरम, आनंद शर्मा, जय राम रमेश , सुरेश प्रभु, प्रफुल्ल पटेल, डॉ सुब्रमण्यम स्वामी, संजय राउत, सतीश चंद्र मिश्रा, एम सी मैरीकॉम, स्वप्न दास गुप्ता और डॉ नरेंद्र जाधव शामिल हैं। सभपति ने इनमें से विभिन्न सदस्यों का नाम लेकर सदन में उनके व्यक्तिगत योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने इस अवसर पर अफसोस भी किया कि पिछले पांच साल में हंगामें के कारण 35 प्रतिशत समय व्यर्थ गया। उन्होंने सांसदों से लोक हित में पूरे उत्साह के साथ अपना कर्तव्य निभाने तथा नियमों तथा प्रक्रियाओं का पूरा सम्मान करने का अह्वान किया। उन्होंने कहा कि विधायिका के सदस्यों को सदन के कार्यवाही में बाधा नहीं डालनी चाहिए और जनता ने जो सम्मान और विश्वास दिया है उसका उन्हें आदर करना चाहिए। नायडु ने कहा कि सदस्यों का यह कर्तव्य है कि वे सदन द्वारा बनाये गये नियमों और नीतियों में जनता के हित को सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि मार्च से जुलाई के बीच सेवानिवृत हो रहे इन सदस्यों का कुल संसदीय अनुभव जोड़ दिया जाये तो वह कुल उनके पास 181 कार्यकाल का अनुभव है जिसमें 143 कार्यकाल राज्यसभा और इससे पहले 38 कार्यकाल लोकसभा का है। उन्होंने कहा ऐसे अवसर कम ही आते हैं जबकि इतने बड़ा अनुभव रखने वाले लोग सेवानिवृत होते हैं। नायडु ने भारत में विधायिकाओं में अनुचित आधार पर बार-बार हंगामें और शोरगुल की स्थिति पर खेद जताते हुए कहा, 'यह चिंता की बात है कि पिछले चार साल में इसी गरिमामय सदन में व्यवधान के कारण काम का 35 प्रतिशत मूल्यवान समय व्यर्थ गया।” उन्होंने कहा कि इस प्रवृति पर बिन देरी किए अंकुश लगाने की आवश्यक्ता है।

उन्होने इस अवसर पर सूचित किया कि सेवानिवृत हो रहे 84 वर्षिय सदस्य श्री बालसुब्रमणियन एक मात्र ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने 2017 में 244 वें सत्र से लेकर पिछले साल शीतकालीन(255वें सत्र) के बीच सभी 234 बैठकों में उपस्थित रहें। श्री नायडु ने कहा कि श्री बालसुब्रमणियन ने अपनी बड़ी उम्र के बावजूद काम के प्रति अपनी उत्साह और निष्ठा में कमी नहीं आने दी।

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