13 जनवरी को है पुत्रदा एकादशी

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  • जरूर पढ़े या सुने यह कथा

पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। ऐसे में इस बार यह पुत्रदा एकादशी 13 जनवरी को है। आप सभी को बता दें कि पुत्रदा एकादशी व्रत संतान प्राप्ति के लिए और संतान के जीवन में आ रहे कष्टों को दूर करने के लिए किया जाता है। ऐसे में आप सभी जानते ही होंगे कि पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसी के साथ इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। कहा जाता है इस दिन भगवान को धूप, दीप, अक्षत, रोली, फूल, नैवेद्य चढ़ाया जाता है और पुत्रदा एकादशी व्रत कथा सुनी जाती है। आप सभी को आज हम बताने जा रहे हैं पुत्रदा एकादशी व्रत कथा, कहा जाता है इस व्रत कथा के बिना पुत्रदा एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा- एक समय में भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चम्पा था। उनके यहां कोई संतान नहीं थी, इसलिए दोनों पति-पत्नी सदा चिन्ता और शोक में रहते थे। इसी शोक में एक दिन राजा राजा सुकेतुमान वन में चले गये। जब राजा को प्यास लगी तो वे एक सरोवर के निकट पहुंचे। वहां बहुत से मुनि वेदपाठ कर रहे थे।

राजा ने उन सभी मुनियों को वंदना की। प्रसन्न होकर मुनियों ने राजा से वरदान मांगने को कहा। मुनि बोले कि पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकदाशी कहते हैं। उस दिन व्रत रखने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। तुम भी वही व्रत करो। ऋषियों के कहने पर राजा ने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया। कुछ ही दिनों बाद रानी चम्पा ने गर्भधारण किया। उचित समय आने पर रानी ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया, जिसने अपने गुणों से पिता को संतुष्ट किया तथा न्यायपूर्वक शासन किया।

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