रोगों से मुक्ति के लिए आज जरूर पढ़े माँ शीतला की कथा

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आज शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. जी दरअसल हिंदू पंचांग के अनुसार, शीतला अष्टमी का त्योहार हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते हैं. ऐसे में इस बार यह व्रत 4 मई 2021 को मनाया जा रहा है. इस दिन माता शीतला देवी की पूजा होती है. जी दरअसल मां शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया है और इसेही प्रसाद के रूप में खाया जाता है. केवल यही नहीं बल्कि आज के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से रोगों से मुक्ति मिलती है. वहीँ पौराणिक मन्यताओं के अनुसार, मां शीतला का व्रत करने से चेचक जैसे संक्रमक रोग से छुटकारा मिलता है. अब हम आपको बताते हैं माँ शीतला की कथा.

माँ शीतला की कथा- बहुत प्राचीन समय की बात है। भारत के किसी गांव में एक बुढ़िया माई रहती थी। वह हर शीतलाष्टमी के दिन शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाती थी। भोग लगाने के बाद ही वह प्रसाद ग्रहण करती थी। गांव में और कोई व्यक्ति शीतला माता का पूजन नहीं करता था। एक दिन गांव में आग लग गई। काफी देर बाद जब आग शांत हुई तो लोगों ने देखा, सबके घर जल गए लेकिन बुढ़िया माई का घर सुरक्षित है।

यह देखकर सब लोग उसके घर गए और पूछने लगे, माई ये चमत्कार कैसे हुआ? सबके घर जल गए लेकिन तुम्हारा घर सुरक्षित कैसे बच गया? बुढ़िया माई बोली, मैं बास्योड़ा के दिन शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाती हूं और उसके बाद ही भोजन ग्रहण करती हूं। माता के प्रताप से ही मेरा घर सुरक्षित बच गया। गांव के लोग शीतला माता की यह अद्भुत कृपा देखकर चकित रह गए। बुढ़िया माई ने उन्हें बताया कि हर साल शीतलाष्टमी के दिन मां शीतला का विधिवत पूजन करना चाहिए, उन्हें ठंडे पकवानों का भोग लगाना चाहिए और पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। पूरी बात सुनकर लोगों ने भी निश्चय किया कि वे हर शीतलाष्टमी पर मां शीतला का पूजन करेंगे, उन्हें ठंडे पकवानों का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करेंगे।

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