रेखा गुप्ता ने गोबर से गैस बनाने वाले बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया

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नई दिल्ली, सोमवार, 19 अक्टूबर 2026। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को निर्मल बनाने के लिए प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकना जरूरी बताते हुए सोमवार को कहा कि केवल नदी की सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन कारणों पर भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, जिनसे प्रदूषक नदी तक पहुंचते हैं। गुप्ता ने यह टिप्पणी नजफगढ़ क्षेत्र में स्थित गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित 200 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन करने के बाद की। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम द्वारा स्थापित संयंत्र से गोबर से स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार होगी जिससे गोबर को यमुना में जाने से रोकने में मदद मिलेगी और पशुपालकों की आय भी बढ़ेगी। गुप्ता ने दावा किया कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में दिल्ली में डेयरी कॉलोनियों की बुनियादी सुविधाओं, जैसे नालियों, पानी की आपूर्ति, कूड़ा उठाने और गोबर संग्रहण की व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्षों तक दिल्ली में एक भी बायोगैस संयंत्र स्थापित नहीं किया गया, जिसके कारण गोबर के उचित प्रबंधन की समस्या बनी रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले डेढ़ वर्ष में तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए तथा छह अन्य संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। गुप्ता ने कहा, “यमुना को निर्मल बनाने के लिए प्रदूषण को उसके स्रोत पर रोकना आवश्यक है। केवल नदी की सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन कारणों पर भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, जिनसे प्रदूषक नदी तक पहुंचते हैं।” गुप्ता के मुताबिक, ऐसे संयंत्र अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों को अवसरों में बदलने और स्वच्छ, हरित एवं टिकाऊ दिल्ली के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने एक बयान में कहा कि दिल्ली नगर निगम द्वारा स्थापित संयंत्र प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर का प्रसंस्करण कर बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन करेगा और इससे प्रतिदिन लगभग 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस और करीब 5.6 टन शुद्ध कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादित होने का अनुमान है, जिसकी आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को की जाएगी। इसके मुताबिक, प्रसंस्करण के बाद बचने वाली ‘बायोगैस स्लरी’ का उपयोग प्राकृतिक खाद के रूप में होगा, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी। परियोजना के तहत एजेंसी डेयरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से गोबर एकत्र करेगी।

गुप्ता ने कहा कि यह परियोजना, केंद्र सरकार की ‘स्वच्छ यमुना पहल’ के तहत महत्वपूर्ण है और इस पहल के अंतर्गत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में डेयरी से निकलने वाले 1,500 टन अपशिष्ट के निपटान का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के 'शहरी विकास कोष' के तहत इस संयंत्र को विकसित किया जा रहा है, ताकि पशुओं के गोबर और नगर निकाय के ठोस अपशिष्ट का निपटान कर उसे ईंधन और जैविक खाद में बदला जा सके। इस अवसर कैबिनेट मंत्री आशीष सूद व दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही समेत अन्य लोग मौजूद थे।

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