यदि न्यायालय को लगता है कि मैंने अनुचित टिप्पणी की है, तो माफी मांगने में कुछ गलत नहीं: राउत

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मुंबई, गुरुवार, 16 अक्टूबर 2026। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय को लगता है कि उन्होंने उसके खिलाफ कोई अनुचित टिप्पणी की है, तो भारतीय संविधान की रक्षा करने वाली इस संस्था से माफी मांगने में कुछ भी गलत नहीं है।  राउत ने पत्रकारों से कहा कि न तो उनका और न ही उनकी पार्टी का शीर्ष अदालत की अवमानना करने का कोई इरादा था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता और अदालत जानती है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय तक किए गए मार्च से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की थी। शीर्ष अदालत ने कहा था, ‘‘हम कोई अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं। हमें पता है कि वे बाहर क्या बयान दे रहे हैं और अदालत में क्या कह रहे हैं। हमें सब कुछ पता है।’’ प्रधान न्यायाधीश की टिप्पणियां राहुल गांधी, संजय राउत या समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से संबंधित होने के दावों के बीच, शिवसेना (उबाठा) के नेता ने कहा कि शीर्ष अदालत ने किसी का नाम नहीं लिया था। राउत ने हालांकि कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह माफी मांगने को तैयार हैं।

राउत ने कहा, ‘‘यदि उच्चतम न्यायालय को लगता है कि याचिकाकर्ता के रूप में संजय राउत ने अनुचित टिप्पणी की है, तो भारतीय संविधान की रक्षा करने वाली शीर्ष अदालत से माफी मांगने में कोई बुराई नहीं है।’’ मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और इस मामले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर विपक्ष की याचिका का जिक्र करते हुए राउत ने कहा, “मैंने माफी मांग ली है, लेकिन हमें न्याय दीजिए। उन 13 करोड़ मतदाताओं को न्याय दीजिए, जिनके नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं।’’

राउत ने अविभाजित शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले की जारी सुनवाई में हो रही “देरी” को लेकर अपनी कुछ टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘आपको हमारी पीड़ा समझनी होगी। साढ़े चार साल हो चुके हैं। हम शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर मुकदमा लड़ रहे हैं। सुनवाई के दौरान चार प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बदल चुके हैं और संविधान-विरोधी सरकार सत्ता में बैठी है। हमें न्याय दीजिए। हमारी बस यही मांग है। अगर हमारी यह मांग गलत है, तो मैं उच्चतम न्यायालय से माफी मांगता हूं।’’

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