पार्टी चुनाव चिह्न को लेकर बोलीं सुप्रिया सुले, 'यह लड़ाई सत्ता के लिए नहीं, संविधान के लिए है

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मुंबई, शुक्रवार, 14 अगस्त 2026। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई को भारतीय लोकतंत्र और संविधान की आत्मा की रक्षा की जंग करार दिया है। सुश्री सुले ने यहां संवाददाता सम्मेलन में इस मामले में न्यायपालिका में हो रही देरी पर सवाल उठाये और कहा कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक आंकड़ों या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नेता शरद पवार ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य संस्थापक हैं और इसके लिए उनके पास पुख्ता और निर्विवाद दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा, " मैं अपनी आखिरी सांस तक यह लड़ाई लड़ूंगी। मैं यह पार्टी खुद के या अपने परिवार के लिए नहीं मांग रही, बल्कि शरद पवार के वाजिब हक के लिए मांग रही हूं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भविष्य पर अंतिम निर्णय केवल श्री शरद पवार का ही होगा।उच्चतम न्यायालय में मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर गहरी निराशा जताते हुए सुश्री सुले ने अन्य हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मुकदमों की तुलना में इसके सुस्त रवैये की आलोचना की। उन्होंने मांग की कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना (गुट) के मामलों की सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए, क्योंकि दोनों ही मामले पार्टी के मालिकाना हक के एक समान संवैधानिक प्रश्नों पर आधारित हैं। चुनावी सफलता को पार्टी की प्रामाणिकता मानने के तर्क को खारिज करते हुए सुश्री सुले ने चेतावनी दी कि देश संविधान से चलता है, किसी की मनमर्जी से नहीं। अगर ताकत के बल पर कोई भी व्यक्ति किसी संस्थान पर दावा ठोकने लगे, तो यह देश के लिए एक खतरनाक मिसाल बन जाएगा। उन्होंने आगाह किया कि यदि असंवैधानिक शक्तियों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह संकट केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में स्वतंत्र संस्थान, मीडिया की स्वतंत्रता और रोजगार के ढांचे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

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