नासिक में 38 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी : छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज, जौहरी गिरफ्तार

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नासिक, सोमवार, 22 जून 2026। नासिक पुलिस ने टीजेएसबी को-ऑपरेटिव बैंक के साथ कथित तौर पर 38 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में बाफना ज्वेलर्स के निदेशक निलेश बाफना को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, निलेश बाफना ने वर्ष 1998 में टीजेएसबी बैंक से 90 लाख रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा ली थी। उन्होंने समय-समय पर इसका भुगतान किया, जिससे बैंक अधिकारियों का उन पर भरोसा बढ़ गया।

पुलिस ने बताया कि बाद में बाफना ने समय-समय पर और ऋण लिया, जिससे कुल बकाया राशि बढ़कर 44 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि, आरोप है कि उन्होंने मार्च 2025 से ऋण पर ब्याज का नियमित भुगतान नहीं किया। उन्होंने बताया कि बैंक ने बाफना को कई नोटिस जारी किए, लेकिन उनका कोई असर नहीं हुआ। बाफना का खाता गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित होने के बाद बैंक ने उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जिला अधिकारी के 12 मई के आदेश के बाद बैंक ने तीन जून को बाफना को नोटिस जारी कर उनकी दुकान में मौजूद सभी सामान अपने कब्जे में लेने की सूचना दी।

अधिकारियों ने बताया कि बाफना ने दुकान का कब्जा बैंक को नहीं सौंपा। इसके बाद पुलिस की मदद से दुकान का शटर तोड़ा गया। जांच में वहां केवल 25,19,250 रुपये मूल्य का माल मिला। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 59.07 करोड़ रुपये मूल्य के माल का फर्जी स्टॉक विवरण तैयार किया था और इन दस्तावेजों को असली बताकर पेश किया था। पुलिस के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक से विभिन्न ऋण सुविधाएं और कैश क्रेडिट प्राप्त किए गए थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 से आरोपियों के लेन-देन की जांच के दौरान इस कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

बैंक के एक अधिकारी की शिकायत के आधार पर सरकारवाड़ा पुलिस ने शनिवार को निलेश सुभाष बाफना, सुभाष लाखीचंद बाफना, नम्रता निलेश बाफना, प्रभावती सुभाष बाफना, सरला परसमल बाफना और गारंटर कांतिलाल लाखीचंद बाफना के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि निलेश बाफना को रविवार को गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उन्हें 26 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए इसे पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया है।

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