सामूहिक प्रयासों की बदौलत 2047 से बहुत पहले ही जड़ से मिट जाएगा सिकल सेल रोग : राष्ट्रपति मुर्मू
ओंकारेश्वर (मध्यप्रदेश), शुक्रवार, 19 जून 2026। खासकर आदिवासी समुदायों में सिकल सेल रोग के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और इसके उन्मूलन के लिए मिले-जुले प्रयासों की जरूरत पर जोर देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि आनुवंशिक रक्त विकार से जुड़ी यह बीमारी वर्ष 2047 के लक्ष्य से बहुत पहले ही देश में जड़ से मिटा दी जाएगी। सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें लाल रक्त कणिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिए (सिकल) जैसी हो जाती हैं। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है और उसे दर्द, एनीमिया, संक्रमण तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
मुर्मू, खंडवा जिले की तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। इस मौके पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ''मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की सामूहिक शक्ति और सक्रियता के बूते हम 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल रोग के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में अवश्य सफल होंगे।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक जुलाई 2023 से मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरुआत की थी। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य देश से 2047 तक इस आनुवंशिक बीमारी को पूरी तरह समाप्त करना है।
मुर्मू ने कहा कि अलग-अलग वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि देश के जनजातीय समुदायों में सिकल सेल एनिमिया का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। राष्ट्रपति ने कहा, ''मैं इस मंच से सभी राज्यों के अधिकारियों और सरकारों से अनुरोध करना चाहती हूं कि इस रोग को सहजता से नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी फैलता है। इसे जड़ से मिटाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए और इसका इलाज संभव है। यह रोग खत्म हो सकता है। ऐसा दावा सामने आया है।" उन्होंने कहा कि सिकल सेल रोग से जुड़ी चुनौतियों को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लेते हुए समग्र दृष्टिकोण से प्रयास किए हैं और देश में पहली बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के तहत अभियान शुरू किया गया है।
राष्ट्रपति ने बताया कि इस अभियान के तहत जनजातीय स्वास्थ्य, आनुवांशिकी विज्ञान, डिजिटल निगरानी और सामाजिक आचरण में बदलाव जैसे पहलुओं को एक साथ जोड़ा गया है। उन्होंने सिकल सेल रोग के उन्मूलन के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाने और विवाह पूर्व 'जेनेटिक काउंसलिंग' कराने, व्यापक जांच के जरिये समय रहते बीमारी की पहचान करने और रोग प्रबंधन की समग्रता सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाए रखने की जरूरतों पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने बताया कि वर्ष 2023 से शुरू किए गए राष्ट्रीय मिशन के तहत सिकल सेल रोग का पता लगाने के लिए लोगों की जांच का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया है। मुर्मू ने कहा, ''मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 साल तक की आयु तक के सात करोड़ से ज्यादा लोगों की जांच का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।'' उन्होंने बताया कि इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहकों (कैरियर) की भी पहचान की जा चुकी है।
राष्ट्रपति ने सिकल सेल रोग को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी की ओर इशारा करते हुए कहा, ''अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे, लेकिन उन्हें इसका नाम तक मालूम नहीं था।'' उन्होंने रेखांकित किया कि देश के जिन 17 राज्यों में सिकल सेल रोग का पता लगाने के लिए लोगों की जांच की गई है, उनमें मध्यप्रदेश और ओडिशा में इस बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा है। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत मध्यप्रदेश की अलग-अलग उपलब्धियां गिनाते हुए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। विश्व सिकल सेल दिवस हर वर्ष 19 जून को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच व उपचार को प्रोत्साहित करना और प्रभावित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
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