उत्तराखंडः कैलाश मानसरोवर यात्रा महंगी हुई, 20 फीसदी ज्यादा मूल्य चुकाना होगा

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नैनीताल, बुधवार, 06 मई 2026। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लिपुलेख दर्रे के जरिए होने वाली वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को अब 2.09 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार चार जुलाई को शुरू हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी मुद्रा की कीमत ज्यादा होने के कारण तिब्बत में होने वाले यात्रा खर्च पर सीधा असर पड़ता है जबकि भारत में भी यात्रा दरें संशोधित हुई हैं और इसलिए इस बार श्रद्धालुओं को पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 20 फीसदी अधिक राशि खर्च करनी होगी।

उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय द्वारा तिब्बत के लिए शुल्क डॉलर में लिया जाता है, जिसमें वीजा, चिकित्सा और अन्य संबंधित खर्चें शामिल होते हैं। इसके अलावा, भारतीय क्षेत्र में श्रद्धालुओं को यात्रा, ठहरने, खाने और गाइड उपलब्ध कराने वाली एजेंसी कुमाउं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने भी अपने शुल्क संशोधित कर पिछले वर्ष के मुकाबले आठ हजार रुपए बढ़ा दिए हैं। इस बार भारतीय क्षेत्र में प्रति यात्री शुल्क 65,000 रुपये हो गया है। पिछले साल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुल शुल्क 1.74 लाख रुपए था, जो इस बार बढ़कर 2.09 लाख रुपये हो गया है।

निगम के महाप्रबंधक विजय नाथ शुक्ला ने संशोधित शुल्क को अंतिम रूप दिये जाने और यात्रा के लिए पंजीकरण जारी होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस बार भी 10 जत्थे जाएंगे और प्रत्येक में 50 तीर्थयात्री शामिल होंगे। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद यात्रा को स्थगित कर दिया गया था लेकिन 1981 में यात्रा दोबारा बहाल हुई थी। कोविड महामारी के कारण इसमें दोबारा व्यवधान आया और काफी प्रयासों के बाद 2025 में यह यात्रा दोबारा शुरू हो पायी। चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का काफी धार्मिक महत्व है। हिंदुओं की मान्यता है कि कैलाश पर्वत भगवान शिव का वास स्थल है और उसकी परिक्रमा करने व मानसरोवर झील में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है । 

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