बंगाल में तैनात सीएपीएफ की 500 कंपनियों को चुनाव बाद भी बनाए रखने का फैसला

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नई दिल्ली, शुक्रवार, 03 अप्रैल 2026। पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की चिंताओं के बीच निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को फैसला किया कि चार मई को मतगणना समाप्त होने के बाद भी राज्य में केंद्रीय बलों की 500 कंपनियों की तैनाती जारी रहेगी। राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे। एक अधिकारी ने बताया, ''पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान के बाद हिंसा हुई थी। यह निर्णय पिछली घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।''

सुरक्षा बल की एक कंपनी में 90 से 125 जवान होते हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 200 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि ये कंपनियां राज्य में मतगणना पूरी होने तक तैनात रहेंगी। चुनाव प्राधिकरण के एक प्रवक्ता ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल के मालदा में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामलों की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारियों के घेराव के मामले की जांच का जिम्मा अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंप दिया। निर्वाचन आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि एनआईए की एक टीम शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में पहुंचेगी।

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल प्रशासन को मतदाता सूची संशोधन अभियान के दौरान मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना को ''निंदनीय'' बताया और हमले को ''रोकने में पूर्णत: नाकाम रहने'' एवं निष्क्रियता के लिए प्रशासन को फटकार लगाई। उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या एनआईए जांच के साथ-साथ राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती का भी निर्देश दिया।

निर्वाचन आयोग ने एनआईए के महानिदेशक को एक पत्र में बताया, ''इस संबंध में, मुझे यह अनुरोध करने का निर्देश दिया गया है कि मामले की आवश्यक जांच/पड़ताल की जाए और उपरोक्त निर्देशों के अनुसार प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे माननीय न्यायालय को प्रस्तुत की जाए।''
 

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