विपक्ष की सशस्त्र पुलिस बल विधेयक जेपीसी को भेजने की मांग

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नई दिल्ली, गुरुवार, 02 अप्रैल 2026। लोकसभा में विपक्ष ने कहा है कि सशस्त्र पुलिस बल विधेयक सरकार जल्दबाजी में लायी है और इसमें गहनता से विचार करने की आवश्यकता है इसलिए विधेयक को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजा जाना चाहिए। लोकसभा में कांग्रेस के हरीश चंद्र मीणा ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गुरुवार को कहा कि विधेयक को जिस तरह से पेश किया गया है वह जल्दबाजी में लाया गया प्रतीत होता है। इस विधेयक में बहुत सारी कमियां हैँ जिन्हें दूर करने की जरूरत है।

इसमें बहुत सुधार की आवश्यकता है। उनका कहना था कि मुद्दा देश की सुरक्षा का है और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए निष्क्रिय नहीं रहा जा सकता है। विधेयक में बहुत खामियां हैं जिन्हें दूर कर विधेयक में सुधार लाया जाना आवश्यक है इसलिए इन कमियों को दूर करने के लिए और विधेयक पर व्यापक स्तर पर विचार करने के लिए इसे जेपीसी को भेजने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी दिक्कत जिम्मेदारी की है। कर्मचारी सरकार के खिलाफ अदालत में गये और सरकार इसमें हार गई लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों को नहीं बताया गया है कि सरकार के खिलाफ उसके कर्मचारी ही न्यायालय में लड़ रहे हैं। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने गत वर्ष अक्टूबर में आदेश दिया है।

सरकार इस लड़ाई में हारी है और इस लड़ाई में जिस तरह की बातें सामने आई हैँ उनसे जाहिर होता है कि सरकार में कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। श्री मीणा ने आरोप लगाया कि विधेयक पर सबकी सहमति आवश्यक है और इसी वजह से उनका कहना है कि इसे संयुक्त समिति को भेजा जाना चाहिए।  उनका कहना था कि इस मामले में सरकार न्यायालय में हारी है और इस हार से साफ होता है कि सरकार की तरफ से तथ्यों को मजबूती से नहीं रखा गया है। उनका कहना था कि सरकार को विधेयक में खामियों को ठीक करना चाहिए और इसके लिए विधेयक को जेपीसी को भेजने की सख्त जरूरत है। भाजपा के राव ने विधेयक को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इस विधेयक के जरिए सरकार आमूलचूल परिवर्तन कर रही है जो वर्तमान परिवेश में बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए आंतरिक शांति और सुरक्षा महत्वपूर्ण है ताकि आंतरिक अनुशासन को मजबूत किया जा सके। किसी भी समाज या देश की उन्नति के लिए आंतरिक सुशासन को मजबूत करना जरुरी है और इस धारणा के आलोक में यह विधेयक लाया जाना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं को आतंरिक सुरक्षा के लिए मजबूत किये जाने की जरूरत है और यह विधेयक आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन में स्पष्टता लाता है। उनका कहना था कि सेवा संस्थान व्यवस्थित होने चाहिए और पारदर्शिता काम की रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास से संस्थान आत्मनिर्भर होंगे और सशस्त्र बलों का मनोबल बढ़ेगा।

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