अमरावती को आंध्र की स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने वाला विधेयक लोकसभा में पारित
नई दिल्ली, बुधवार, 01 अप्रैल 2026। लोकसभा ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने संबंधी विधेयक बुधवार को पारित कर दिया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें यह कहने में खुशी हो रही है कि इस संबंध में आंध्र प्रदेश विधानसभा से आए संकल्प पर लोकसभा में सभी ने सहमति व्यक्त की है। मंत्री के जवाब के बाद, सदन ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। हालांकि, चर्चा के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने विधेयक के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया। वाईएसआर पार्टी के नेता मिथुन रेड्डी का कहना था कि उनकी पार्टी विधेयक के वर्तमान स्वरूप को प्रदेश के हित के खिलाफ मानती है।
मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि आंध्र प्रदेश विधानसभा के 28 मार्च 2026 के संकल्प को प्रभावी बनाने के लिए और आंध्र प्रदेश राज्य की राजधानी (अमरावती) के संबंध में वैधानिक स्पष्टता लाने के उद्देश्य से संशोधन का प्रस्ताव किया गया। इससे पहले, राय ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में चर्चा और पारित किये जाने के लिए पेश किया। सरकार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख घटक दल तेलुगु देसम पार्टी (तेदेपा) और राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने की दिशा में यह कदम उठाया है।
यह प्रस्तावित कानून अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी बनाने के निर्णय को भविष्य में बदल दिए जाने के किसी भी ऐसे प्रयास को रोक देगा, जैसा कि वाईएसआर कांग्रेस अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार द्वारा किया गया था। बीते 28 मार्च को राज्य विधानसभा ने भी एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें आंध्र प्रदेश की नयी राजधानी के रूप में ‘‘अमरावती’’ का नाम शामिल करने के मकसद से आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा पांच में संशोधन के लिए केंद्र से अनुरोध किया गया।
आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद वर्ष 2014 और 2019 के बीच राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में तेदेपा प्रमुख नायडू ने घोषणा की थी कि अमरावती राज्य की राजधानी होगी और इसके विकास में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा। हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनाव में तेदेपा ने सत्ता गंवा दी और रेड्डी ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। अपने कार्यकाल के दौरान रेड्डी ने नायडू के फैसले को बदल दिया और घोषणा की कि आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियां होंगी जिसके तहत विशाखापत्तनम को प्रशासनिक राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी घोषित किया गया। वर्ष 2024 में नायडू के सत्ता में लौटने के बाद, उन्होंने घोषणा की कि अमरावती राज्य की एकमात्र राजधानी होगी।
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था। उस अधिनियम के तहत हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बताया गया, लेकिन इसमें इसका कोई उल्लेख नहीं था कि आंध्र प्रदेश की राजधानी कहां बनेगी। राजग सरकार द्वारा प्रस्तावित आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक अमरावती के दावे को राज्य की एकमात्र राजधानी के रूप में कानूनी मजबूती देगा। तेदेपा राजग की एक प्रमुख सहयोगी है और लोकसभा में अपने 16 सांसदों के साथ नरेन्द्र मोदी सरकार को महत्वपूर्ण समर्थन देती है।
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