राज्यसभा में विपक्षी दलों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने को कहा

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नई दिल्ली, सोमवार, 30 मार्च 2026। राज्यसभा में सोमवार को कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के बारे में सरकार द्वारा लाये गये एक विधेयक का विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति में भेजने का सुझाव दिया तथा इस बात पर हैरत जतायी कि बलों के अधिकारियों के साथ अन्याय करने के लिए यह विधायी कदम क्यों उठाया जा रहा है? उच्च सदन में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक ने कहा कि यह विधेयक केवल सामान्य प्रशासन से जुड़ा नहीं है बल्कि यह संविधान के प्रावधानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हक ने कहा कि यह राज्य की भूमिका को सीमित करता है और संवैधानिक ढांचे को चुनौती देता है। उन्होंने दावा किया कि यह संघीय ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के माध्यम से इस बल के अधिकारियों के आगे बढ़ने के रास्ते को बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से केंद्र सरकार की नीयत साफ हो जाती है क्योंकि वह सुधार नहीं चाहती बल्कि नियंत्रण चाहती है।

चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है क्योंकि यह उच्च न्यायालय के एक निर्णय का घोर उल्लंघन करता है और सत्ता के विभाजन के संविधान के नियमों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में केंद्रीय सशस्त्र बलों के कई कर्मियों ने आत्महत्या की या नौकरी से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि इसका कारण काम का अत्यधिक दबाव, तनाव, पदोन्नति के कम अवसर तथा परिवार से दूरी आदि शामिल हैं।

शिवा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस बल में उच्च पदों पर आईपीएस अधिकारियों को क्रमिक रूप से हटाकर बल के ही अधिकारियों को यह दायित्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि पता नहीं क्यों, सरकार ने इस आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर कर दी जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विधायिका के पास कानून बनाने का अधिकार है किंतु इस विधेयक को पारित करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय ने जिन खामियों की ओर इंगित किया है, उन्हें इसमें दूर किया जाए।

शिवा ने सरकार से अनुरोध किया कि यदि वह कुछ नहीं कर सकती तो कम से कम उनके संशोधनों को स्वीकार कर ले अथवा इसे संसद की स्थायी समिति या प्रवर समिति के पास भेज दे। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान एवं अधिकारी आज संसद की ओर बहुत ध्यान से देख रहे होंगे। उन्होंने कहा कि देश की 15 हजार किलोमीटर लंबी सीमा की यह जवान और अधिकारी रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि यह जवान जब मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देते हैं तो सरकार उन्हें शहीद का दर्जा तक नहीं देती, जो इस बल के प्रति अन्याय है।

सिंह ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 62 अधिकारियों सहित 2290 कर्मियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 85 अधिकारियों सहित 2014 कर्मियों, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक अधिकारी सहित 126 कर्मियों, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 13 अधिकारी सहित 182 कर्मियों, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पांच अधिकारी सहित 91 कर्मियों अपने जीवन का बलिदान दिया है।

आप सदस्य ने कहा कि सत्तारूढ़ दल ने इन सुरक्षा कर्मियों के नाम पर देश भर में वोट मांगा किंतु उनको न तो शहीद का दर्जा दिया जा रहा है न ही उन्हें समय पर पदोन्नति दी जाती है। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को मिलने वाली पदोन्नति से इस बल के अधिकारियों को मिलने वाली पदोन्नति की तुलना करते हुए कहा कि इनको बहुत देर बाद प्रमोशन दिया जाता है। सिंह ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में इस बल के अधिकारियों की पदोन्नति के बारे में एक निर्णय किया था और सरकार ने यह विधेयक लाकर अपने ही आदेश को पलट दिया है।

उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वह बल के अधिकारियों के हक को छीनने और मारने का काम नहीं करे तथा इस बारे में विपक्ष द्वारा लाये गये संशोधन को स्वीकार करे या इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजे। चर्चा में भाग लेते हुए बीजू जनता दल के मुजीबुल्ला खान ने सरकार ने पूछा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले इन जवानों के बारे में अदालत द्वारा आदेश पारित करने के बावजूद यह विधेयक क्यों लाया गया?

राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आईपीएस अधिकारी जहां पंद्रह साल में चार से पांच पदोन्नति पाते हैं वही केंद्रीय सशस्त्र बल के अधिकारी एक भी पदोन्नति नहीं पाते हैं, जो अन्याय है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में इस बल में कर्मियों द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की संख्या में 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक दिन इस बल के अधिकारियों के साथ दिवाली मनाते जरूर हैं किंतु इससे उनका क्या भला होगा ‘‘जबकि होना यह चाहिए कि सरकार ऐसा काम करे कि इन कर्मियों के जीवन में हर दिन दिवाली आए।’’ यादव ने भी इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने का सुझाव दिया।

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