राजग के 21 वर्षों के शासनकाल में बिहार सभी मापदंडों पर 'विफल': तेजस्वी

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पटना, गुरुवार, 12 मार्च 2026। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि लंबे समय से 'डबल इंजन' की सरकार होने के बावजूद बिहार देश के विकास सूचकांकों में सबसे पीछे बना हुआ है। यादव ने जारी एक बयान में कहा कि बिहार एक अनोखा प्रदेश है, जहां दशकों से राजग की 'डबल इंजन' सरकार है, फिर भी यह देश का सबसे गरीब राज्य बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि बिहार कई सामाजिक-आर्थिक मानकों पर देश में सबसे पीछे है। उनके अनुसार, देश में सबसे अधिक पलायन, अपराध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बहुआयामी गरीबी बिहार में है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी सबसे अधिक है, जबकि साक्षरता दर, प्रति व्यक्ति आय, किसानों की आय, प्रति व्यक्ति निवेश और प्रति व्यक्ति उपभोग सबसे कम है। यादव ने आरोप लगाया कि कंप्यूटर साक्षरता, बिजली की खपत, बुनियादी सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और औद्योगिक इकाइयों की संख्या के मामले में भी बिहार देश में सबसे पीछे है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के स्कूलों में कंप्यूटर और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) प्रयोगशालाओं की उपलब्धता भी सबसे कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी खराब है और विकास के अधिकतर सूचकांकों में बिहार सबसे फिसड्डी है। यादव ने कहा कि राज्य के लोग महंगी रसोई गैस, महंगी बिजली और महंगे पेट्रोल-डीजल खरीदने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में जमीन और संपत्ति की कीमतें दिल्ली और मुंबई की तुलना में भी अधिक हो गई हैं।

राजद नेता ने कहा कि पिछले 21 वर्षों की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के दौरान बिहार विकास के लगभग सभी मानकों और सूचकांकों में पीछे रहा है, लेकिन इन तथ्यों और रैंकिंग को लेकर किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग प्रशासनिक तंत्र, सरकारी संसाधनों, वोट की राजनीति और जातिवाद के सहारे सत्ता का आनंद ले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बिहार इकाई के प्रवक्ता नीरज कुमार ने यादव द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''राजद नेता को बिहार की मौजूदा स्थिति की तुलना 1990 से 2005 के बीच के उस दौर से करनी चाहिए थी जब राज्य में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी का शासन था। स्थिति में सुधार केवल 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राजग सरकार के सत्ता में आने के बाद ही हुआ।''

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