फोन टैपिंग मामले में एसआईटी का नोटिस कांग्रेस सरकार की राजनीतिक प्रताड़ना: बीआरएस नेता हरीश राव

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हैदराबाद, मंगलवार, 20 जनवरी 2026। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) विधायक टी. हरीश राव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि फोन टैपिंग मामले में पूछताछ के लिए उन्हें तेलंगाना पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष पेश होने के वास्ते दिया गया नोटिस कांग्रेस सरकार की ओर से ‘‘राजनीतिक प्रताड़ना’’ है और इसका उद्देश्य नगर निकाय चुनाव से पहले ‘‘अपने भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाना’’ है। हरीश राव ने एसआईटी के समक्ष पेश होने से पहले संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि यह नोटिस उन्हें राज्य की खनन कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज के टेंडर में कथित ‘‘भ्रष्टाचार’’ को लेकर आरोप लगाने के तुरंत बाद जारी किया गया।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा फोन टैपिंग से जुड़े एक मामले को खारिज किए जाने के बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हमें पता है कि आपने (मुख्यमंत्री) केटीआर (बीआरएस नेता के. टी. रामाराव) को फॉर्मूला-ई रेस मामले में कैसे परेशान किया और हमारे अन्य नेताओं को किस तरह तंग किया जा रहा है। अब मुझे भी उसी तरह परेशान किया जा रहा है। हालांकि, हम जनता की ओर से सवाल उठाते रहेंगे।’’ हरीश राव ने यह भी दावा किया कि उनका फोन टैपिंग मामले से कोई संबंध नहीं है, इसके बावजूद उन्हें तलब किया गया है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में कानूनी रास्ता अपनाएंगे।

गौरतलब है कि राज्य के पूर्ववर्ती बीआरएस शासनकाल के दौरान कथित फोन टैपिंग मामले की जांच के तहत तेलंगाना पुलिस की एसआईटी ने हरीश राव को मंगलवार को यहां पेश होने का नोटिस जारी किया है। नौ सदस्यीय एसआईटी का नेतृत्व हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी. सी. सज्जनार कर रहे हैं। इससे पहले, बीआरएस के विधान परिषद सदस्य नवीन राव चार जनवरी को इस मामले में एसआईटी के समक्ष पेश हो चुके हैं। मामले के मुख्य आरोपी और तेलंगाना के पूर्व खुफिया प्रमुख टी. प्रभाकर राव से भी पहले पूछताछ की जा चुकी है।

हैदराबाद पुलिस ने मार्च 2024 से अब तक तेलंगाना विशेष खुफिया ब्यूरो (एसआईबी) के एक निलंबित डीएसपी सहित चार पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। उन पर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खुफिया जानकारी मिटाने और पूर्व बीआरएस शासन के दौरान कथित फोन टैपिंग के आरोप हैं। बाद में उन्हें जमानत दे दी गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित साजिश का हिस्सा थे, जिसमें एसआईबी के संसाधनों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करके विभिन्न वर्गों के नागरिकों की निगरानी की गई।

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