वोट पाने के लिए आरएसएस शैली की 'विभाजनकारी राजनीति' अपना रही माकपा- वीडी सतीशन
कोच्चि, सोमवार, 19 जनवरी 2026। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ माकपा वोट हासिल करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के "विभाजनकारी राजनीति" के रास्ते पर चल रही है। सतीशन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और उसके नेताओं द्वारा लगाए गए इन आरोपों का जवाब दे रहे थे कि कांग्रेस और वह अल्पसंख्यक तुष्टीकरण में लिप्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "माकपा आरएसएस के ही रास्ते पर चल रही है—वोट हासिल करने के लिए लोगों को बांट रही है। मुख्यमंत्री इसका समर्थन कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने माकपा नेता ए के बालन के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर यूडीएफ सत्ता में आया तो सांप्रदायिक दंगे भड़क जाएंगे, जबकि मुख्यमंत्री ने मंत्री साजी चेरियन की हाल की टिप्पणी पर कोई बयान नहीं दिया।
चेरियन ने मलप्पुरम जिला पंचायत और कासरगोड नगर पालिका में चुने गए लोगों के कथित तौर पर धर्म का जिक्र किया था। सतीशन ने चेरियन पर आरोप लगाते हुए कहा, "केरल विधानसभा के इतिहास में किसी भी सदस्य ने ऐसा सांप्रदायिक बयान नहीं दिया है। उन्होंने लोगों से चुनाव जीतने वालों के धर्म को देखने को कहा।" उन्होंने चेतावनी दी कि माकपा की "विभाजनकारी राजनीति" केरल को एक खतरनाक स्थिति में धकेल देगी और राज्य के मूल मूल्यों को नष्ट कर देगी। उनके अनुसार, विजयन और वह, दोनों ही एक दिन स्मृतियों में सिमट जाएंगे, लेकिन केरल का अस्तित्व बना रहेगा। उन्होंने कहा, "माकपा केरल की नींव को बर्बाद कर रही है। यह राज्य के भविष्य के खिलाफ एक घोर अत्याचार है। कृपया आने वाली पीढ़ियों के साथ ऐसा अन्याय न करें।" उन्होंने कहा कि माकपा नेताओं के बयान आरएसएस के बयानों से अलग नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "उन्हें यह समझना चाहिए कि अगर ऐसे बयान जारी रहे तो केरल का क्या हाल होगा।" एनएसएस और एसएनडीपी योगम के नेताओं द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए, सतीशन ने कहा कि उन्हें इन आरोपों से कोई फर्क नहीं पड़ता और उनका रुख सांप्रदायिकता के खिलाफ दृढ़ है। उन्होंने कहा कि वह कई मौकों पर नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) के महासचिव जी सुकुमारन नायर और श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन सहित कई सामुदायिक नेताओं से मिल चुके हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता बनने के बाद भी वह दोनों नेताओं से मिलते रहे। उन्होंने कहा, "वोट किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं होते; वे जनता द्वारा दिए जाते हैं। चुनाव से पहले सभी उम्मीदवार सामुदायिक नेताओं से मिलते हैं।" उन्होंने कहा कि अगर ऐसी मुलाकातों को राजनीतिक मकसद से प्रेरित माना जाता है, तो वे इन्हें बंद करने को तैयार हैं। सतीशन ने आरोप लगाया कि माकपा को 45 वर्षों से अधिक समय से जमात-ए-इस्लामी से समर्थन मिल रहा था और दावा किया कि विजयन ने संगठन के अमीर से मुलाकात की थी। उन्होंने माकपा के इस आरोप को "बेबुनियाद" बताया कि अगर यूडीएफ सत्ता में आता है तो केरल में जमात-ए-इस्लामी का शासन होगा। उन्होंने पूछा, "42 वर्षों तक जमात-ए-इस्लामी माकपा के साथ थी। क्या एलडीएफ के सत्ता में रहते हुए यह संगठन गृह विभाग चला रहा था?" सतीशन ने कहा कि वह समुदायों के नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे।
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