तृणमूल सांसद ने रास में सदस्यों के ‘व्यवस्था का प्रश्न’ उठाने के अधिकार की सुरक्षा की मांग की
नई दिल्ली, शुक्रवार, 05 दिसंबर 2025। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन से आग्रह किया कि ‘‘व्यवस्था का प्रश्न’’ उठाने के सदस्यों के अधिकार की सुरक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि कभी-कभी सदस्यों को अपनी बात उठाने के लिए लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है। सभापति ने कहा कि एक ही समय में कई सदस्य व्यवस्था का प्रश्न उठाते हैं जबकि एक समय में एक ही सदस्य को आसन से अनुमति मांगनी चाहिए। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान ओ’ब्रायन ने नियम 258 के तहत व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि अगले सप्ताह सदन के कामकाज की सूची बनाते समय संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने चुनाव सुधार पर बहस को सूचीबद्ध नहीं किया जबकि उच्च सदन की कार्य मंत्रणा समिति की पिछली बैठक में इस पर फैसला हो चुका था।
उन्होंने आरोप लगाया कि बृहस्पतिवार को विपक्षी सदस्यों को 45 मिनट तक खड़े रहने के बावजूद व्यवस्था का प्रश्न उठाने की अनुमति नहीं दी गई। इससे पहले संसदीय मामलों के राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने कहा था कि अगले सप्ताह सदन में तीन विषय लिए जाएंगे, जिनमें वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा और विनियोग विधेयक सहित दो विधेयकों को लोकसभा को लौटाना शामिल है। तृणमूल सदस्य ने व्यवस्था के प्रश्न के तहत कहा कि कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) ने अल्पकालिक चर्चा के लिए दो विषय तय किए थे लेकिन मंत्री ने उनमें से एक का ही जिक्र किया। ओ’ब्रायन ने कहा कि ‘‘एक विषय का ही जिक्र किया गया और उन्होंने (मंत्री ने) चुनाव सुधार पर चर्चा का विषय नहीं पढ़ा।’’
सदन में तृणमूल कांग्रेस के नेता ने जोर देकर कहा कि नियम 258 हर सांसद का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा, “जब कोई सदस्य खड़ा होकर ‘व्यवस्था का प्रश्न’ कहता है, तब इसे सुनना सदन का कर्तव्य है। कल हमने 45 मिनट तक ‘व्यवस्था का प्रश्न’ उठाने की कोशिश की। पहले हम अपनी जगहों पर खड़े हुए फिर सदन के नेता के तौर पर मुझे अपनी जगह से उठ कर आगे तक जाना पड़ा। कृपया सर, हमारे इस अधिकार की रक्षा करें। यह हमारा अधिकार है, इसे कोई छीन नहीं सकता।” सभापति राधाकृष्णन ने कहा, “जब आप व्यवस्था का प्रश्न उठाते हैं, तो केवल एक व्यक्ति को ही बोलना चाहिए। सभी एक साथ बोलने लगें तो क्या वह व्यवस्था का प्रश्न होगा?”
संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि बीएसी के निर्णय का पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम पर चर्चा मंगलवार को होगी और चुनाव सुधारों से संबंधित विषय लोकसभा में चर्चा समाप्त होने के तुरंत बाद उठाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम नियमों और प्रक्रियाओं, कार्य नियमों और आसन के निर्णयों का पालन करते हैं। जब भी व्यवस्था का प्रश्न उठता है, तो इसे सदस्य का अधिकार मानकर उसकी बात सुनी जाती है। सभापति सही कहते हैं कि जब कई सदस्य खड़े होकर शोर मचाते हैं, तो व्यवस्था का प्रश्न उठाने की अनुमति देने की संभावना नहीं रहती।”
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