न्यायालय ने सूफी संत का पार्थिव शरीर भारत लाने के अनुरोध संबंधी याचिका खारिज की
नई दिल्ली, शुक्रवार, 05 अप्रैल 2024। उच्चतम न्यायालय ने सूफी संत हजरत शाह मोहम्मद अब्दुल मुक्तदिर शाह मसूद अहमद का पार्थिव शरीर बांग्लादेश से भारत लाने के अनुरोध संबंधी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि सूफी संत के पाकिस्तानी नागरिक होने के कारण उनका पार्थिव शरीर लाने का अनुरोध करने का संवैधानिक रूप से लागू करने योग्य कोई अधिकार नहीं है
पीठ ने सवाल किया, “वह पाकिस्तानी नागरिक थे, आप भारत सरकार से उनका पार्थिव शरीर भारत लाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?” याचिकाकर्ता दरगाह हजरत मुल्ला सैयद की ओर से पेश वकील ने कहा कि संत का पाकिस्तान में कोई परिवार नहीं है, जबकि उत्तर प्रदेश की दरगाह में वह सज्जादा-नशीन (आध्यात्मिक प्रमुख) थे। वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि संत का जन्म उस समय इलाहाबाद कहे जाने वाले प्रयागराज में हुआ था और वह पाकिस्तान चले गए। 1992 में उन्हें पाकिस्तानी नागरिकता मिल गई।
पीठ ने कहा, ‘उन्हें 2008 में प्रयागराज में स्थित दरगाह हजरत मुल्ला सैयद मोहम्मद शाह की दरगाह का सज्जादा नशीन चुना गया था। उन्होंने दरगाह में दफन होने की इच्छा व्यक्त करते हुए 2021 में वसीयत की थी। ढाका में उनकी मृत्यु हो गई, जहां उन्हें दफना दिया गया। ऐसी याचिका पर विचार करने में परेशानिया हैं।” पीठ ने कहा, “हजरत शाह पाकिस्तानी नागरिक थे और कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। पार्थिव शरीर को कब्र से निकालने के संबंध में व्यवहारिक जटिलताएं हैं। इस अदालत के लिए किसी विदेशी का पार्थिव शरीर भारत लाने का निर्देश देना सही नहीं होगा।”
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