हनुमान जी को लाल सिंदूर क्यों लगाते हैं
देवताओं के सेनापति हैं मंगल। स्वभाव से ये उग्र हैं। प्राचिन धर्म ग्रथों में लाल रंग को रजोगुण का प्रतीेक स्वीकार किया गया है। रजोगुण शक्ति केंद्र है। रजोगुण का ही परिणाम है गति। यही कारण है कि शक्ति उपासक विभिन्न अनुष्ठानों में लाल रंग के वस्त्रों को धारण करते हैं। सिंदूर का निर्माण सीसे से होता है,जो शक्ति का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। शारीरिक,मानसिक और आयात्मिक बल का सकार विग्रह हैं हनुमान। इसलिए उनके विग्रह पर सिंदूर का लेपन होता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार,मां सीता को अपनी मांग में सिंदुर भरते देख कर एक बार हनुमान ने जब ऎसा करने का कारण पूछा,तो जानकी ने कहा, पुत्र एक तो यह श्रीराम की दीर्घायु के लिए है, दूसरे इसे देखकर श्राीराम प्रसन्न होते हैं, क्योंकि सिंदूर लगाने का अर्थ है कि श्रीराम ही मेरा स्र्वस्व हैं।
कथा के अनुसार इसके बाद हनुमान काफी देर तक सोच-विचार करते रहे और फिर उन्होंने कुछ निय कर लिया। अगले दिन श्रीराम के दरबार में जब हनुमान प्रविष्ट हुए तो उन्होंने अपने पुरे शरीर पर सिंदूर का लेप किया हुआ था। हनुमान के इस रूप को देखकर समूची राजसभा आश्चर्यचकित हो गई। सब हनुमान की बुद्धिमत्ता से परिचित थे। श्रीराम के साथ सिंहासन पर विराजमान मां सीता मुस्करा रही थीं। वे हनुमान की इस लीला को समझ गई थीं। श्रीराम ने सीता की ओर दृष्टि डाली। सीता गंभीर हो गई। श्रीराम के पूछने पर जब हनुमान ने अपने मन की बात बताई तो श्रीराम गद्गह हो उठे। ऎसा करके हनुमान ने एक बार फिर श्रीराम के चरणों में अपनी भक्ति को मुखरित कर दिया था। भक्त को भगवान की उपासना ऎसे करनी चाहिए, जैसे कोई साधवी पत्नी अपने पति के प्रति पूर्णरूप से समर्पित रहती है-शक्ति संपन्न होती हुई भी वह उसके समक्ष प्रेमवश अबला हो जाती है।
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