यहाँ जानिए क्या है कूर्म जयंती के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने आज ही के दिन यानी इसी तिथि पर कछुए के रूप में अवतार लेकर समुद्र मंथन में मथनी के रूप में उपयोग होने वाले मदरांचल पर्वत को आधार प्रदान किया था। जी हाँ और कुछ लोगों को कहना है कि इस बार कूर्म जयंती 15 मई, रविवार को मनाई जानी चाहिए, वहीं कुछ का मत है कि वैशाख पूर्णिमा का सूर्योदय 16 मई, सोमवार को होने से इस दिन ये पर्व मनाया जाना चाहिए। हालाँकि आज हम आपको बताने जा रहे हैं कूर्म जयंती 2022 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.
कूर्म जयंती 2022 शुभ मुहूर्त- पूर्णिमा तिथि 15 मई को दोपहर 12.45 से 16 मई सुबह लगभग 10 बजे तक रहेगी। जी हाँ और शास्त्रों के अनुसार, 15 मई को कूर्म जयंती मनाना श्रेष्ठ रहेगा। ऐसे में पूजा के लिए शाम 4.22 से 07.05 तक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त है।
इस विधि से करें पूजा- 15 मई, रविवार की शाम को शुभ मुहूर्त में घर की पूर्व दिशा में तांबे के कलश में पानी, दूध, तिल, गुड़ फूल और चावल मिलाकर कलश स्थापित करके कूर्म अवतार की पूजा करें। अब इसके बाद दीपक जलाएं। सिंदूर और लाल फूल चढ़ाएं। अंत में रेवड़ियों का भोग लगाएं तथा किसी माला से इस मंत्र का जाप करें। पूजन मंत्र: ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:॥ कहा जाता है भगवद् गीता में वर्णित है कि जब-जब धरती पर पाप की अधिकता होगी तब-तब पाप के नाश के लिए धरती पर प्रभु अवतार लेंगे.
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