आज इस आरती से करने मां कात्यायनी को खुश
- पढ़े यह स्त्रोत और ध्यान मंत्र
आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है। ऐसे में आज के दिन मां कात्यायनी की पूजा करने का विधान है। आपको पता ही होगा कि माँ कात्यायनी दुर्गा जी का छठा अवतार हैं। इसी के साथ शास्त्रों के अनुसार देवी ने कात्यायन ऋषि के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इस कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ गया। अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं मां कात्यायनी की आरती, स्त्रोत पाठ, ध्यान मंत्र जिनका आज के दिन आपको जाप करना चाहिए।
मां कात्यायनी की आरती-
जय जय अंबे जय कात्यायनी ।
जय जगमाता जग की महारानी ।।बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा ।।कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की ।।झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपानेवाली।।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ।।जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।
मां कात्यायनी का स्त्रोत पाठ-
कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
मां कात्यायनी ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥
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