जानिए गणेश जी क्यों करते हैं मूषक की सवारी

img

गणेश जी मूषक की सवारी करते हैं। यह बात हर किसी को पता है। लेकिन इस बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है कि आखिर मूषक ही क्यों गणेश जी की सवारी क्यों बना। दरअसल इससे जुड़ी हुई तमाम कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से ही एक कथा के मुताबिक एक बार गजमुखासुर नाम के एक राक्षस का गणेश जी से युद्ध हुआ था। कहा जाता है कि गजमुखासुर को यह वरदान मिला हुआ था कि वह किसी अस्त्र से नहीं मारा जा सकता है। इसे देखते हुए गजमुखासुर को मारने के लिए गणेश जी ने अपना एक दांत तोड़ दिया। इससे गजमुखासुर काफी परेशान हो गया और मूषक का रूप धारण करके भागने लगा। लेकिन गणेश जी ने मूषक बने गजमुखासुर को अपने पाश में बांध लिया, जिसके बाद वह गणेश जी से क्षमा-याचना करने लगा। गणेश जी ने गजमुखासुर को माफ कर दिया और मूषक को अपनी सवारी बना ली।

मूषक के गणेश जी की सवारी बनने को लेकर एक कथा का उल्लेख गणेश पुराण में भी किया गया है। इस कथा के अनुसार, द्वापर युग में एक विख्यात महर्षि पराशर हुआ करते थे। एक बार एक बड़े ही बलवान मूषक ने महर्षि पराशर के आश्रम में पहुंचकर उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। मूषक ने महर्षि के आश्रम में पड़े सारे मिट्टी के बर्तन तोड़ डाले। इसके अलावा उसने आश्रम में रखे अनाज व ऋषियों के वस्त्र और ग्रथों को भी कुतर डाला। इससे महर्षि पराशर दुखी हो उठे और गणेश जी की प्रार्थना करने लगे। गणेश जी महर्षि की भक्ति से प्रसन्न हुए और मूषक को पकड़ने की योजना बनाई।

बताया जाता है कि गजानन ने मूषक को पकड़ने के लिए पाश फेंका। मूषक इस पाश का पीछा करते हुए पाताल लोग तक पहुंच गया। इसके बाद मूषक को पकड़कर गणेश जी के सामने लाया गया। यहां पर कथा में उस घटनाक्रम का जिक्र है जब गणेश जी ने मूषक को अपनी सवारी बना ली। कहा जाता है कि गणेश जी जब पहली बार मूषक के ऊपर बैठे तो वह उनका वजन सहन नहीं कर पाया। इसके बाद गणेश जी ने अपना वजन कम कर लिया और तभी से मूषक गणेश जी की सवारी बना हुआ है।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement