प्रदूषण से कैंसर मस्तिष्क आघात और हार्ट अटैक का खतरा

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राष्ट्रीय राजधानी में पिछले एक सप्ताह से प्रदूषण का स्तर खतरनाक मानक पर पहुंचने की घटना को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि अब तक ऐसी कोई दवा या मशीन का अविष्कार नहीं हुआ है जो लोगों को वायु प्रदूषण के खतरे से पूरी तरह बचा सके, लेकिन सतर्कता बरतकर इसके खतरे से कुछ हद तक बचा जा सकता है और साझा प्रयास से ही शुद्ध हवा नसीब हो सकती है। 

खराब सेहत की घटनाएं बढ़ रही 

  • हर साल वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण लोगों की सेहत खराब होने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के साथ लोगों के हृदयघात, मस्तिष्काघात और फेफड़े के कैंसर की चपेट में आने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसकी वजह से दिल की बीमारी और फेफड़े में संक्रमण वाले मरीजों के साथसाथ बच्चों तथा बूढ़ों की सेहत चिंताजनक हो जाती है। 

सेहत में पड़ने वाला बुरा प्रभाव

  • प्रदूषण के कारण नवजात बच्चों के फेफड़े अच्छी तरह विकसित नहीं हो पाते हैं।
  • बुढ़ापे में सांस संबंधी बीमारी होने का खतरा अधिक होता है।
  • गर्भ में पल रहे बच्चों पर भी वायु प्रदूषण का गंभीर असर पड़ता है। अध्ययन में देखा गया है कि ऐसे बच्चों का वजन कम होता है और उनका समय से पहले जन्म लेने की आशंका बढ़ जाती है।
  • प्रदूषण से दिल का दौरा पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। प्रदूषण के सबसे छोटे कण पी.एम. 2.5 खून में प्रवेश कर जाते हैं। इसके कारण धमनियों में सूजन आ जाती है और इससे दिल के दौरे और मस्तिष्काघात का खतरा बढ़ जाता है।

पी.एम. कण

  • पी.एम. 2.5 और पी.एम. 10 कण इतने छोटे हैं कि इन्हें आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये गैस के रूप में कार्य करते हैं। सांस लेते समय ये कण फेफड़ों में चले जाते हैं, जिससे खांसी और अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं। कैंसर उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा और मस्तिष्काघात कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरुप समय से पहले मृत्यु भी हो सकती है। पी.एम. 2.5 का स्तर ज्यादा होने पर धुंध बढ़ जाती है और साफ दिखना भी कम हो जाता है। सिर दर्द और आंखों में जलन भी होती है। इन कणों का हवा में स्तर बढ़ने से मरीज, बच्चे और बुजुर्ग सबसे पहले प्रभावित होते हैं। 

सावधानी बरतने में ही है बचाव

  • प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक हो जाने पर जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए।
  • सुबह-शाम की सैर, और खुले में कसरत से बचना आश्वयक है।
  • वायु प्रदूषण के कुप्रभाव से व्यक्तिगत स्तर पर कुछ करके बचना मुश्किल है, समाज और सरकार के साझा प्रयास से ही इस पर नियंत्रण संभव है।

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