जानें किसने प्रसन्न होकर दिया था भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र

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भगवान विष्णु की अनेक ऐसे तो अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित है, इसी तरह एक कथा के अनुसार माना जाता है कि भगवान विष्णु के पास सुदर्शन चक्र नाम का शस्त्र था जो तीनों लोक में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। सुदर्शन चक्र के लिए मान्यता है कि एक बार वो प्रयोग किए जाने के बाद अपना काम पूरा करने के बाद ही वापस लौटता है। ये शक्तिशाली शस्त्र भगवान विष्णु के पास किस प्रकार आया इसके लिए अनेकों कथाएं प्रचलित है लेकिन आज हम आपके लिए एक ऐसा प्रसंग लेकर आए हैं जिसमें बताया गया है कि किसने प्रसन्न होकर विष्णु जी को सुदर्शन चक्र दिया था और सलाह देते हुए कहा सावधानी से प्रयोग करने के लिए कहा था।

एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु भगवान शिव के पूजन के लिए काशी गए। वहां पहुंच थकान मिटाने के लिए उन्होनें मणिकर्णिका घाट पर स्नान करके भगवान शिव को हजार कमल के फूलों को शिव जी को चढ़ाने का संकल्प लिया। भगवान शिव ने विष्णु जी की परीक्षा लेने के लिए उन फूलों में से एक फूल कम कर दिया। विष्णु जी की भक्ति सच्ची थी उन्होनें उस एक कमल की जगह अपनी आंख चढ़ाने का फैसला ले लिया। माना जाता है कि भगवान विष्णु की आंखें कमल से भी सुंदर थीं और उन्हें कमलनयन और पुण्डरीकाक्ष भी कहा जाता है।

भगवान विष्णु ने अपनी आंख भगवान शिव को अर्पित करने के लिए जैसे ही आगे बढ़े। वैसे ही भगवान शिव प्रकट हुए और कहा कि तुम मेरे सच्चे भक्त हो, तुम्हारे जैसा कोई नहीं हो सकता है। इस दिन उन्होनें भगवान विष्णु को सबसे शक्तिशाली अस्त्र सुदर्शन चक्र दिया और कहा कि तीनों लोकों में इसकी बराबरी करने वाला कोई नहीं होगा, लेकिन इसका प्रयोग तुम्हें संभल कर करना होगा। इसका एक वार पूरी सृष्टि के लिए हानिकारक हो सकता है। इस चक्र से भगवान विष्णु ने कई दैत्यों का वध किया और देवताओं की रक्षा की थी। इसके बाद सुदर्शन चक्र हमेशा के लिए उनसे जुड़ गया।

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