किस वजह से मनता है दशहरा? जानिए त्योहार की अहमियत और इतिहास

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दशहरा हर साल इसे नवरात्र के 10वें दिन ही मनाया जाता है। भारत के कोने-कोने में अलग-अलग तरीकों से लोग इस पर्व को मनाते हैं और लंकापति राणव क पुतले दहन करते हैं। लेकिन बहुत सारे लोग इस त्योहार का हिस्सा बनने के बाद भी नहीं जानते हैं कि असल में यह मनाया किसलिए जाता है। आइए जानते हैं कि पर्व का इतिहास और अहमियत। 

राम ने रावण का किया था संहार: ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर धरती को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इस साल दशहरा का पर्व 8 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन लोग नवरात्र व्रत का पारण करते हैं। तमाम जगहों पर रामलीलाएं आयोजित की जाती हैं और रावण के पुतलों का दहन किया जाता है। इसके अलावा दुर्गा पूजा के दौरान स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी दिन किया जाता है।

मां दुर्गा को दी जाती है विदाई: दशहरा तीन दिवसीय दुर्गा पूजा का समापन पर्व भी होता है। नवरात्र के आखिरी तीन दिनों को दुर्गा पूजा के रूप में देश भर में मनाया जाता है। इस दौरान बड़े-बड़े पंडालों में दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। इन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी दशहरा के दिन ही किया जाता है। इसके अलावा नवरात्र के 9 दिनों के व्रत का पारण भी विजयादशमी को होता है। ऐसा भी कहा जाता है विजयदशमी का पर्व दुर्गा पूजा और नवरात्रि की समाप्ति का प्रतीक है। इसके अलावा दशहरे के दिन अस्त्र शस्त्र की भी पूजा होती है। दशहरे के साथ ही दीपावली की तैयारी शुरू हो जाती है। दशहरे के दिन शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है।

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