चांद पर पहुंचने के करीब चंद्रयान-2

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  • 11 साल बाद पूरा होगा भारत का सपना

नई दिल्ली, शुक्रवार, 06 सितम्बर 2019। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इतिहास रचने से कुछ ही कदम दूर है। इसरो का अब तक का सबसे बडा मिशन चंद्रयान-2 का विक्रम कुछ घंटों के बाद चांद पर अपना कदम रखेगा। चंद्रयान-2 का भारत का वो मिशन जिसका इंतजार हर हिंदुस्तानी कर रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों ने इस मिशन को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की है। हर कोई इसके सफल होने की कामना कर रहा है। आपको बता दे, चंद्रयान-2 मिशन को 18 सितंबर, 2008 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंजूरी दी थी।

अब आज 11 साल बाद ये मिशन पूरा होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज रात बेंगलुरु में इसरो सेंटर में मौजूद रहेंगे और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे। चंद्रयान-2 का विक्रम देर रात 01.30 से लैंड करना शुरू करेगा, ये प्रक्रिया सात सितंबर सुबह 5 बजे तक जारी रहेगी। भारत का ये मिशन चंद्रयान-2 कई बातों में खास है, मिशन से जुड़ी कई जानकारियां ऐसी हैं जिन्हें हर किसी को जानना जरूरी है। क्योंकि भारत के वैज्ञानिक इतिहास रचने के कगार पर खड़े हैं। इसरो की आधिकारिक वेबसाइट https://www.isro.gov.in/ पर इस मिशन की कुछ अहम जानकारियां साझा की गई हैं, जो इस प्रकार हैं।

चंद्रयान-2 क्यों है खास

  • पहला अंतरिक्ष मिशन जो चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का संचालन करेगा।
  • पहला भारतीय अभियान, जो स्वदेशी तकनीक से चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा।
  • पहला भारतीय अभियान जो देश में विकसित प्रौद्योगिकी के साथ चांद की सतह के बारे में जानकारियां जुटाएगा।
  • चंद्रमा की सतह पर रॉकेट उतारने वाला चौथा देश (रूस, अमेरिका, चीन और भारत) बन जाएगा।

चंद्रयान-2 में क्या-क्या है

  • लांचर : जीएसएलवी एमके-3 भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है और इसे पूरी तरह से देश में ही निर्मित किया गया है।
  • ऑर्बिटर : ऑर्बिटर, चंद्रमा की सतह का निरीक्षण करेगा और पृथ्वी तथा चंद्रयान 2 के लैंडर-विक्रम के बीच संकेत रिले करेगा।
  • विक्रम लैंडर : लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह पर भारत की पहली सफल लैंडिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • प्रज्ञान रोवर : रोवर ए आई-संचालित 6-पहिया वाहन है, इसका नाम ‘प्रज्ञान’ है, जो संस्कृत के ज्ञान शब्द से लिया गया है।

क्यों जरूरी है ये मिशन

  • चांद हमें पृथ्वी के क्रमिक विकास और सौर मंडल के पर्यावरण की अविश्वसनीय जानकारियां दे सकता है। वैसे तो कुछ परिपक्व मॉडल मौजूद हैं, लेकिन चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में और अधिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। चांद की सतह को व्यापक बनाकर इसकी संरचना में बदलाव का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।
  • चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास के बारे में भी कई महत्वपूर्ण सूचनाएं जुटाई जा सकेंगी। वहां पानी होने के सबूत तो चंद्रयान 1 ने खोज लिए थे और यह पता लगाया जा सकेगा कि चांद की सतह और उपसतह के कितने भाग में पानी है।

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