अंगूठा चूसने वाले बच्चे जीवनभर रहते है तंदरुस्त, शोध का दावा

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तकरीबन सभी बच्चों का अंगूठा चूसना या फिर नाखून चबाना मां बाप को कभी पसंद नहीं आता। उन्हें डर रहता है कि बच्चा बीमार हो जाएगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर बच्चे को इन में से कोई आदत है तो वो बीमारियों से बचा जा सकता है। अमेरिका में हुई एक रिसर्च की मानें तो ऐसा करने वाले बच्चे ज्यादा सेहतमंद रहते हैं।

वही, नाखून की गंदगी शरीर में जाती है और इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया इत्यादि से लड़ने लगता है। इस तरह बचपन से ही शरीर को कई तरह के रोगाणुओं से लड़ने की आदत पड़ जाती है। इन बच्चों को फायदा यह होता है कि शरीर कई तरह की एलर्जी से बच जाता है।

इंसानों में कई तरह की एलर्जियां देखी गयी हैं। किसी को पोलन यानी पराग से एलर्जी होती है, तो किसी को मसालों से। ऐसे लोगों के शरीर में जब सांस के साथ पराग के कण या फिर मसाले जाते हैं, तो वे छींकने लगते हैं। कुछ लोगों को एलर्जी का असर त्वचा पर देखने को मिलता है। 

जानकारी के अनुसार अमेरिका में हुई रिसर्च में भी यही तरीका अपनाया गया।  1,037 लोगों पर ये टेस्ट किए गए- पहली बार जब वे 13 साल के थे और दूसरी बार जब वे 32 के हुए. इसके अलावा पांच, सात, नौ और ग्यारह की उम्र में उनके अंगूठा चूसने और नाखून चबाने की आदतों को भी रिकॉर्ड किया गया। 

शोध में पाया गया कि जिन लोगों को बचपन में दोनों में से कोई भी आदत नहीं थी, उनमें से 49 फीसदी को किसी ना किसी चीज की एलर्जी जरूर थी। जिन्हें दोनों में से कोई एक आदत थी, उनमें से 38 फीसदी के साथ ऐसा था और जिन्हें दोनों ही आदतें थीं, उनमें से सिर्फ 31 फीसदी को ही एलर्जी थी। जब 13 साल की उम्र में उन पर टेस्ट किए गए तब भी यही नतीजे मिले और बाद में 32 साल पर भी।

हालांकि दमे जैसी बीमारियों पर इसका कोई असर नहीं देखा गया। शोध में कहा गया है, "हम यह नहीं कह रहे हैं कि बच्चों को ऐसी आदतों के लिए प्रेरित करना चाहिए" लेकिन इतना तो साफ है कि जो बच्चे थोड़ी बहुत गंदगी में खेल कूद कर बड़े होते हैं, उनका शरीर बीमारियों से बेहतर रूप से लड़ पाता है।

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