गंभीर मामला हो सकता है कान में दर्द, जानें कैसे करें बचाव

img

कई बार घरेलू उपचार से ठीक करने की कोशिशों में कान से जुड़ी समस्याएं बहरेपन का कारण बन जाती हैं। ज्यादा दिन तक कान दर्द की अनदेखी करना सही नहीं। जानें, क्या करें... 

दो या तीन दिन से ज्यादा कान दर्द रहने पर डाक्टर से संपर्क?करना ही बेहतर है। ‘कान के मध्य से लेकर गले के पीछे मौजूद यूस्टेकियन ट्यूब के अवरुद्ध होने से अक्सर कान में दर्द होने लगता है। कान के मध्य में सूजन या संक्रमण होने लगता है, जिससे दर्द होता है। कान में फुंसी होना, वैक्स का बहुत ज्यादा या कम बनना आदि सामान्य समस्याएं लापरवाही करने पर बहरेपन तक ले जा सकती है। कान दर्द दो तरह से होता है। एक, जब कान के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में गड़बड़ी के कारण दर्द होता है। दूसरा, जब शरीर के अन्य  हिस्से में हुई समस्या जैसे दांत में दर्द  या गला खराब होने पर कान में दर्द होता है। 

ये हो सकते हैं कारण 

  • यूस्टेकियन ट्यूब में अवरोध : कान एक नली से नाक के पिछले व गले के ऊपरी हिस्से से जुड़ा होता है। साइनस और टॉन्सिल होने पर इसी कारण कान के भीतर दर्द महसूस होता है। कान में सूजन आ जाती है और यूस्टेकियन ट्यूब बंद होने लगती है। कान में मवाद बनने लगता है, जो कान के पर्दे को नुक्सान पहुंचाता है।  कान में दर्द ,सूजन ,या कान से मवाद निकलना इसके लक्षण हैं। 
  • कान में मैल जमा होना : जिन लोगों की त्वचा बहुत तैलीय होती है, उनको वैक्स की परेशानी ज्यादा होती है। वैक्स नाखून की तरह बढ़ता है। इसके निकलने के कुछ दिनों बाद ही यह फिर से बनने लगता है। ज्यादा समय तक वैक्स जमा रहने से वह सख्त हो जाता है और कैनाल को ब्लॉक कर देता है। इस कारण कान में दर्द होता है और कम सुनाई देने लगता है। 
  • ओटाइटिस  मीडिया : यह कान के मध्य में होने वाला संक्र मण है। बच्चों को ज्यादा होता है। डब्ल्यू एचओ के अनुसार दो हफ्ते से अधिक संक्रमण रहने पर उसे क्रॉनिक इन्फैक्शन माना जाता है। यह बहरेपन का खतरा बढ़ाता है, पर यह ठीक हो सकता है।  संक्र मण के आम कारणों में सर्दी या फ्लू का वायरस, धूल से एलर्जी शामिल हैं। इसमें तेज बुखार, कान में दर्द, सुनने में कठिनाई या कान से पस निकलता है।   
  • कान के पर्दे का चोटिल होना : कान की भीतरी ट्यूब बेहद संवेदनशील होती है। हल्का सा अधिक दबाव पड़ने पर यह ट्यूब चोटिल हो जाती है, जिससे दर्द होने लगता है।  कान से पस भी निकलने लगता है। ज्यादा समय तक यह समस्या रहने से आस-पास की हड्डियां गलने लगती है। बैरोट्रॉमा की समस्या, सिर पर गंभीर चोट, बहुत तेज आवाज, ओटाइटिस मीडिया, मध्य कान में संक्र मण जैसे कारण भी पर्दे को नुक्सान पहुंचाते हैं। 
  • साइनस संक्र मण : यह संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया या फंगस से हो सकता है। साइनस में संक्रमण होने या अवरोध होने से कान में हवा का दबाव प्रभावित होता है, जिससे दर्द होने लगता है। 
  • ऑटोमीकोसिस : बारिश के मौसम में कान में फंगल इंफैक्शन हो सकता है। यह उमस के कारण हो जाता है। इसके मरीज को सीधे कूलर के सामने नहीं सोना चाहिए। इसमें  तेज दर्द और खुजली होती है।
  • ईयर बैरोट्रॉमा : इसके तहत बाहरी दबाव के कारण कान का अंदरूनी भाग चोटिल हो जाता है। बाहरी दबाव हवा या पानी का दबाव हो सकता है। ईयर बैरोट्रॉमा आमतौर पर स्काई डाइविंग, स्कूबा डाइविंग या हवाई जहाज उड़ानों के दौरान अनुभव होता है। हवा के बुलबुले लगातार कान के भीतरी दबाव से संतुलन बनाने के लिए हलचल करते रहते हैं। बैरोट्रॉमा के कारणों में गले में सूजन, एलर्जी से नाक का बंद होना, श्वसन संक्र मण, दबाव में अचानक परिवर्तन शामिल हैं। मधुमेह रोगियों को खास एहतियात की जरूरत होती है। 

कैसे बचाव करें

  • कानों को बार-बार न धोएं। पिन, तिल्ली, चाबी आदि कान में न डालें। 
  • अच्छी क्वालिटी का हैड फोन इस्तेमाल करें। लगातार तेज आवाज में हैड फोन लगाकर सुनने से बचें।
  • त्वचा व बालों के उत्पाद अच्छी क्वालिटी के इस्तेमाल करें। 
  • तैराकी करते हुए कान में पानी न जाने दें। कान दर्द है तो तैराकी न करें। 
  • मांसपेशियों को सक्रि य रखने के लिए नियमित प्राणायाम आदि व्यायाम करें। 
  • कान में वैक्स बहुत बनती है तो हर चार माह बाद डाक्टर से सफाई करवाएं। 
  • कान में हल्का दर्द है तो शुरु आती उपचार के तौर पर ठंडे पानी के कपड़े से कान के बाहरी हिस्से पर सैंक दें।  
  • दवा डाक्टर की सलाह से ही लें। 

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement