कश्मीर मामले में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार, कहा सरकार पर विश्वास रखें

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नई दिल्ली, मंगलवार, 13 अगस्त 2019। जम्मू कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा हटाई गई धारा 370 के बाद घाटी में हिंसा की कोई घटना न हो इसलिए वहां धारा 144 केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई है। कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 144 को हटाने और कश्मीर में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले में दखल देने से इंकार कर दिया है। देश के उच्चतम न्यायल की तरफ से कहा गया कि यह मामला बहुत संवेदनशील है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई भी दखल देगा तो उसका मामला बिगड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर वहां से धारा 144 हटा दी जाए तो अगर कोई अप्रिय घटना हो गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? कोर्ट ने कहा कि इलाके में सरकार द्वारा लगू धारा 144 वहां स्थानिय लोगों की भलाई के लिए ही हैं।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल पूछा कि घाटी में पाबांदियां कब तक रहेंगी? इसपर अटॉर्नी ने कहा कि जैसे ही घाटी की स्थिति सामान्य हो जाएगी और किसी प्रकार से कोई खतरा नहीं होगा तो व्यवस्था भी सामान्य हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के हालात पहले से बहुत बहतर है और कर्फ्यू में भी ढील दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आप स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम रोज समीक्षा कर रहे हैं। सुधार आ रहा है। उम्मीद है कि कुछ दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे।

सुनवाई के दौरान पूनावाला की वकील मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि संचार ठप होने से कश्मीर के लोगों और वहां तैनात सैनिकों को भारी परेशानी हो रही है। जवाब देते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने कहा कि आप अब सैनिकों की क्यों बात कर रही हैं? ये तो आपकी याचिका नहीं है। सैनिकों का सहारा मत लीजिए।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील है। ऐसे मामले रातोंरात नहीं सुलझते। हमे सरकार को वक्त दिना चाहिए। सरकार पर विश्वास करें।

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