108 नामों वालों हनुमान जी के बारें में जानिए कुछ खास बातें

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धर्म शास्त्रों में हनुमान जी को भगवान राम का भक्त बताया गया है। हनुमान जी के बारे में कहा गया है कि वो दूसरों के दुखों को हर लेते हैं जिसके कारण उन्हें संकटमोचन हनुमान भी कहा जाता है। ऐसी मान्यताएं है कि अगर हनुमान जी को सच्चे मन से याद किया जाए तो वो अपने भक्तों का हर कष्ट दूर कर देते हैं। उनकी माता का नाम अंजनी होने के कारण उन्हें अंजनी पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। हनुमान जी के बारे में कई ऐसी बातें हैं जिन्हें शायद ही आप जानते हों।

धर्म शास्त्रों के मुताबिक हनुमान जी शंकर भगवान का 11 वां अवतार हैं। हनुमान जी का जन्म अपनी माता के श्राप को हरने के लिए हुआ था। महाभारत के भीम के बारें में सभी लोगों को पता है लेकिन ये बात कम ही लोग जानते हैं कि भीम भी श्री हनुमान जी भाई थे क्योंक‍ि भीम भी पवनपुत्र के बेटे थे।

हनुमान जी के 108 नाम हैं। इनके सभी नामों का मतलब ही जीवन का सार है। इनके हर नाम का कुछ ना कुछ मतलब होता है। हनुमान जी के बारे में कहा जाता है कि एक बार भगवान राम के गुरु विश्वामित्र हनुमान जी से गुस्सा हो गए। गुस्से में विश्वामित्र ने श्री राम से कहा कि वो हनुमान को सजा दें। भगवान राम अपने गुरु को मना नहीं करते थे। अपने गुरु की आज्ञा मानकर उन्होंने हनुमान जी को सजा भी दी। बताया जाता है कि श्री राम हनुमान जी को सजा दे रहे थे तो हनुमान जी ने राम का नाम जपना शुरु कर दिया। इससे उन पर सारे प्रहार विफल हो गए।

मंदिरों में हनुमान जी पर सिंदूर चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एक बार जब हनुमान जी ने सुना कि माता सिता अपनी मांग में सिंदूर लगाती हैं तो ये बात सुनकर उन्होंने भी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था। इसके बाद से ही हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

हनुमानजी ने भगवान राम के लिए अपनी छाती चीर दी थी इसके पिछे कि कहानी है कि जब हृदय में प्रकट श्रीराम और सीता ने हनुमान जी को एक कीमती सोने का हार भेंट में देने की सोची तो हनुमान जी इसे लेने से मना कर दिया। इससे माता सीता गुस्सा हो गई। तभी हनुमान जी ने अपनी छाती चीरकर श्री राम को दिखाई और कहा क‍ि उनके लिए इससे ज्यादा कुछ कीमती कुछ भी नहीं।

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