खरीफ ऋतु में बोई जाने वाली सब्जियों के बारे में दी जानकारी

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बाड़मेर। भारत एक प्रमुख सब्जी उत्पादक राष्ट्र है जहाँ समुद्र तल से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है। स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर अब तक देश में सब्जियों के उत्पादन में लगभग 9 गुणा बढ़ोत्तरी हुई है और 162.19 मिलियन टन (2012-13) शाकीय उत्पादन कर भारत विश्व के सब्जी उत्पादक देशों में दूसरा स्थान रखता है। लेकिन यदि प्रति व्यक्ति दैनिक सब्जी उपलब्धता की बात की जाए तो वर्तमान समय में यह उपलब्धता लगभग 240 ग्राम ही है। इसका मुख्य कारण है: बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता शहरीकरण, घटती कृषि जोत, पर्यावरणीय कारक, बढ़ता रोग प्रकोप, जलवायु परिवर्तन, सब्जियों की उन्नतशील किस्मों का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होना आदि।

सन् 2025 तक भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को पोषण सुरक्षा की दृष्टि से 300 ग्राम सब्जी प्रतिदिन/व्यक्ति उपलब्ध कराने के लिए हमें सब्जियों का उत्पादन और अधिक (300 मिलियन टन तक) बढ़ाना होगा। क्योकि सब्जियाँ हमारे दैनिक आहार का अभिन्न अंग है क्योंकि हमारे शरीर के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व, कार्य करने के लिए उर्जा तथा रोग-व्याधियों से सुरक्षा के लिए एण्टी आक्सिडेन्ट्स, सब्जियों मे प्रचुर मात्रा में पाये जाते है। साथ ही भूमि उपयोग सुधारने, फसल विविधता को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा देश की जनता को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा प्रदान करने में सब्जियों की अपनी अलग उपयोगिता है।

उक्त विचार कृषि विज्ञान केन्द्र बाड़मेर के विशेषज्ञ बागवानी एवं प्रशिक्षण अधिकारी बुध्दा राम मोरवाल ने गांव बिशाला आगोर में खरिफ ऋतु में होने वाली सब्जियों की खेती में मुख्य रूप से सोलेनेसी वर्गीय सब्जीयो की मुख्य फसलों में वैधिक समेकित फसल प्रबंधन (बैगन एवं मिर्च) पर दो दिवसीय प्रषिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित कशको को सम्बोधित करते हुऐ व्यक्त किये कि सब्जियों की खेती में किसान भाईयों को बीज चुनाव व पौध उगाने से लेकर फलत् में आने तक प्रत्येक अवसर पर उचित मार्ग दर्षन की आवष्यकता पड़ती है। उचित जानकारी के अभाव में वे सब्जियों की भरपूर पैदावार नहीं ले पाते।

इसका मुख्य कारण है सब्जियों की खेती करने के वैज्ञानिक तकनीकों के ज्ञान नही है। यदि हम सही किस्म का चुनाव, सब्जी उत्पादन की उन्नतशील तकनीकों, कीट-व्याधियों का उचित प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती एवं सब्जी उत्पादन करे तो अधिक फसलो की तुलना में अधिक पैदावार ले सकते है। साथ ही सब्जियों की नर्सरी तैयार करने की विधि कि जानकारी दी। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र शस्य विज्ञान शाखा के अधिकारी श्याम दास ने प्रशिक्षण उपस्थित कशको को सब्जियों में पोषण प्रबन्धन पर जोर देते हुऐ बारिश की कमी को देखते जल अभाव के कारण सब्जी से अधिक पैदावार लेने के लिये बून्द-बून्द सिचांई पर जोर दिया साथ ही खरीफ में ऋतु में फसलो का उन्नत किस्मों की जानकारी दि गई। प्रशिक्षण में गांव के प्रगतिशील कशक शंकरा राम, मांगाराम, उतमाराम, जेताराम सोनाराम, रूपाराम सहित कई कशक उपस्थि रहे।
 

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