अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

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रिश्तों को बेहतर बनाने के कुछ ऐसे उपाय आपको बताने जा रहे हैं, जिसे आप अपनाकर अपने पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में मिठास भर कर उन्हें और भी सुखद बना सकते हैं।

पारिवारिक रिश्ते

  • सबसे पहले बात करते हैं पारिवारिक रिश्तों की जो हमें विरासत में मिलते हैं और किसी पूंजी से कम नहीं होते। हम आपको बताते हैं वे तरीके जिन से आप बना सकते हैं अपने पारिवारिक रिश्तों को मजबूत

प्रपंच छोड़ें

  • प्रपंच बड़ा चटपटा शब्द है। लोग इसे चटखारे ले ले कर इस्तेमाल करते हैं। मसलन, बहू के भाई ने इंटरकास्ट मैरिज कर ली। बस फिर तो बहू का ससुराल के लोगों से नजरें मिलाना मुश्किल हो गया। सासू मां अपने दिए संस्कारों की मिसाल दे दे कर बहू के मायके के लोगों की धज्जियां उड़ाने में मशगूल हो गर्इं। क्यों, भई इसे प्रपंच का मुद्दा बनाने की क्या जरूरत है? इंटरकास्ट मैरिज कोई गुनाह तो नहीं है। हां, यह बात अलग है कि आप के समाज वाले इसे पचा नहीं सकते। लेकिन बहू तो आपके ही घर की है। उसके सुख-दुख में शरीक होना आपका कर्तव्य है, जिसको आप प्रपंच में उड़ा रही हैं। आपको क्या लगता है, प्रपंच करने से आप खुद को दूसरों की नजर में महान बना लेते हैं और सामने वाले को दूसरों की नजरों से गिरा देते हैं। नहीं इस से आप की ही साख पर असर पड़ता है। आपके ही परिवार का मजाक बनता है, जिसमें आप खुद भी शामिल होते हैं।

अपना उत्तरदायित्व समझें 

  • उत्तरदायित्व का मतलब सिर्फ माता-पिता की सेवा करना ही नहीं, बल्कि अपने बच्चों के प्रति भी आपके कुछ उत्तरदायित्व होते हैं। आजकल के माता-पिता आधुनिकता की चादर में लिपटे हुए हैं। बच्चों को पैदा करने और उन्हें सुख-सुविधा देने को ही वे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। लेकिन इस से ज्यादा वे अपनी पर्सनल लाइफ को ही महत्व देते हैं। इस स्थिति में यही कहा जाएगा कि आप एक आदर्श माता-पिता नहीं हैं। लेकिन आप भी आदर्श होने का तमगा पा सकते हैं यदि आप अपने उत्तरदायित्वों को पूरी शिद्दत से निभाएं।

झूठ का न लें सहारा

  • अक्सर देखा गया है कि अपनी जिम्मेदारियों से बचने, अपनी साख बढ़ाने या फिर अपनी गलती छिपाने के लिए लोग झूठ का सहारा लेते हैं। संयुक्त परिवार में झूठ की दरारें ज्यादा देखने को मिलती हैं, क्योंकि एक-दूसरे से खुद को बेहतर साबित करने की प्रतिस्पर्धा में लोगों से गलतियां भी होती हैं। लेकिन इन्हें नकारात्मक रूप से लेने की जगह सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। जब आप ऐसी सोच रखेंगे तो झूठ बोलने का सवाल ही नहीं उठता। इस वर्ष सोच में सकारात्मकता ले कर आएं। इससे पारिवारिक रिश्तों के साथ आपका व्यक्तित्व भी सुधर जाएगा।

आर्थिक मनमुटाव से बचें 

  • आधुनिकता के जमाने में लोगों ने रिश्तों को भी पैसों से तराजू में तोलना शुरू कर दिया है। रिश्तेदारियों में अक्सर समारोह के नाम पर धन लूटने का रिवाज है। शादी जैसे समारोह को ही ले लीजिए। यहां शगुन के रूप में लिफाफे देने और लेने का रिवाज है। इन लिफाफों में पैसे रखकर रिश्तेदारों को दिए जाते हैं। जो जितने पैसे देता है उसे भी उतने ही पैसे लौटा कर व्यवहार पूरा किया जाता है। लेकिन ऐसे रिश्तों का कोई फायदा नहीं जो पैसों के आधार पर बनते बिगड़ते हैं। इसलिए तय कीजिए कि रिश्तों में आर्थिक मनमुटाव की स्थिति से बचेंगे, रिश्तों को भावनाओं से मजबूत बनाएंगे।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लेख हमारे देश के संविधान में भी किया गया है, लेकिन परिवार के संविधान में यह हक कुछ लोगों को ही हासिल होता है, जो बेहद गलत है। अपनी बात कहने का हक हर किसी को देना चाहिए। कई बार हम सामने वाले की बात नहीं सुनते या उसे दबाने की कोशिश करते हैं अपने सीधेपन के कारण वह दब भी जाता है, लेकिन नुक्सान किस का होता है? आप का, वह ऐसे कि यदि वह आप को सही सलाह भी दे रहा होता है, तो आप उसकी नहीं सुनते और अपना ही राग अलापते रहते हैं। ऐसे में सही और गलत का अंतर आप कभी नहीं समझ सकते। इसलिए इस वर्ष से तय करें कि घर में पुरुष हो या महिला, छोटा हो या बड़ा हर किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी जाएगी।

सामाजिक रिश्ते

  • संतुलित और सुखद जिंदगी जीने के लिए पारिवारिक रिश्तों के साथ-साथ सामाजिक रिश्तों को भी मजबूत बनाना जरूरी है। 

ईगो का करें त्याग

  • ईगो बेहद छोटा लेकिन बेहद खतरनाक शब्द है। ईगो मनुष्य पर तब हावी होता है जब वह अपने आगे सामने वाले को कुछ भी नहीं समझना चाहता। उसे दुख पहुंचाना चाहता हो या फिर उसका आत्मविश्वास कम करने की इच्छा रखता हो। अक्सर दफ्तरों में साथ काम करने वाले साथियों के बीच ईगो की दीवार तनी रहती है। इस चक्कर में कई बार वे ऐसे कदम उठा लेते हैं, जो उन के व्यक्तित्व पर दाग लगा देते हैं या कई बार वे सामने वाले को काफी हद तक नुक्सान पहुंचाने में कामयाब हो जाते हैं। लेकिन क्या ईगो आप को किसी भी स्तर पर ऊंचा उठा सकता है? 
  • शायद नहीं यह हमेशा आप से गलत काम ही करवाता है। आपको खराब मनुष्य की श्रेणी में लाता है, तो फिर ऐसे ईगो का क्या लाभ जो आप को फायदे से ज्यादा नुक्सान पहुंचाता हो? ठान लीजिए की ईगो का नामो-निशान अपने व्यक्तित्व पर से मिटा देंगे और दूसरों का बुरा करने की जगह अपने व्यक्तित्व को निखारने में समय खर्च करेंगे।

मददगार बनें 

  • मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और हमेशा से समूह में रहता चला आया है। इस समूह में कई लोग उस के जानकार होते हैं तो कई अनजान भी। लेकिन मदद एक ऐसी प्रक्रिया है जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है। किसी की तकलीफ में उस का साथ देना या उसकी हर संभव मदद करना एक मनुष्य होने के नाते आप का कर्तव्य है।

खुल कर सोचें बड़ा सोचें 

  • अपनी सोच का विस्तार करें। ऐसा करने पर आप पाएंगे कि आप से ज्यादा संतुष्ट और चिंतामुक्त मनुष्य और कोई नहीं है। ऐसे कई लोग आप को अपने आसपास मिल जाएंगे जो अपना वक्त सिर्फ दूसरों के बारे में सोचने में जाया कर देते हैं। 
  • उन्हें हर वक्त यही लगता है कि उन के लिए कोई गलत कर रहा है या कह रहा है। लेकिन जरा सोचें, क्या इस भागतीदौड़ती दुनिया में किसी के पास दूसरे के लिए सोचने-समझने का समय है? नहीं है। इसलिए आप भी अपने बारे में सोचें और किसी का नुक्सान न करते हुए अपने फायदे का काम करें।

सम्मान करें और सम्मान पाएं 

  • कई लोग जब किसी बड़े स्तर पर पहुंच जाते हैं तो वे हमेशा अपने से छोटे स्तर पर खड़े लोगों को हिकारत की नजर से देखने लगते हैं। अक्सर दफ्तरों में ऐसा होता है कि खुद को सीनियर कहलवाने की जिद में लोग अपने से नीचे ओहदे वालों का शोषण और अपमान करना शुरू कर देते हैं। 
  • लेकिन आप ने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि कीचड़ पर पत्थर फैंको तो खुद पर भी कीचड़ उछल कर आता है। उसी तरह अपमान करने वाले को भी अपमान ही मिलता है। इसलिए तय कर लीजिए कि हर स्थिति व परिस्थिति में आप सभी से सम्मानपूर्वक ही पेश आएंगे।

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