जानिए, आखिर क्यों लेना पड़ा भगवान शिव को हनुमान अवतार?

img

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने हनुमान का अवतार लिया था। ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि भगवान शिव ने कुल 12 अवतार लिए हैं। जिनमें से एक अवतार उनका हनुमान का भी है। शास्त्रों की मानें तो हनुमान जी के जन्म की दो तिथि का उल्लेख किया गया है। पहला शिव का अवतार है क्योंकि हनुमान जी की माता अंजनी ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी और उन्हें पुत्र के रूप में पाने का वरदान मांगा था। ऐसे में भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना सुन ली और फिर चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को राम भक्त हनुमान का जन्म हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर भगवान शिव को हनुमान का अवतार क्यों लेना पड़ा? यदि नहीं तो आगे हम इसे जानते हैं।

रामायण में यह उल्लेख मिलता है कि एक बार भगवान शिव की भी इच्छा हुई कि पृथ्वी पर जाकर भगवान राम के दर्शन किए जाए। कहते हैं कि उस वक्त भगवान राम की आयु लगभग पांच साल की रही होगी। भगवान शिव के सामने समस्या यह थी कि वह अपने असली रूप में नहीं जा सकते थे। ऐसे में एक दिन शिव ने माता पार्वती कहा कि ये पार्वती ! मेरे राम ने पृथ्वी पर जन्म लिया है। "मैं उनके दर्शन और सेवा के लिए पृथ्वी लोक पर जा रहा हूं।" ये सुनकर पार्वती दुखी हो गई और शिव से बोली- हे स्वामी! "मुझसे ऐसी कौन सी गलती हुई कि आप मुझे छोड़कर पृथ्वी लोक पर जा रहे हैं।

साथ ही पार्वती ने शिव से कहा कि आप जा रहे हैं तो जाएं लेकिन आपके बिना "मैं जीवित नहीं बचुंगी।" उनकी बात सुनकर शिव को एहसाह हुआ कि पार्वती मेरे बिना नहीं रह सकती है। ऐसे में भगवान शिव मोह में फंस जाते हैं। फिर भगवान शिव में 12 रुद्रों का रहस्य पार्वती को बताया। और बोले- "देखो पार्वती- इन 12 रुद्रों में से एक रूप वानर का अवतार आज मैं लेने वाला हूं।" एक रुद्राक्ष में से एक रूप वानर होगा जो हनुमान के रूप में जाना जाएगा। इस तरह भगवान शिव ने अपने 12 रुद्रों में से एक अवतार हनुमान का लिया। कालांतर में इसे ही हनुमान का रुद्रावतार कहा जाने लगा।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement