गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही चिकित्सा संस्थानों  का किया जाएगा कायाकल्प- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

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जयपुर, बुधवार, 12 जून 2019। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंतर््ी डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि सरकार आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए संकल्पबद्ध है। सरकार न केवल आमजन के लिए गुणवतायुक्त चिकित्सा उपलब्ध करवाएगी बल्कि चिकित्सा संस्थानों के कायाकल्प का भी हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान जो भी चुनौतियां आएंगी उनका सामना करेंगे एवं राज्य को और अधिक स्वस्थ और तंदुरूस्त बनाएंगे।   शर्मा बुधवार को कायाकल्प, गुणवत्ता आश्वासन की कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि रोगमुक्त राजस्थान के निर्माण के लिए हम सब को संकल्पबद्ध होकर कार्य करने की आवश्यकता है। सरकार ने प्रदेशवासियों को राइट-टू-हैल्थ देने का वादा किया था और इस दिशा में काम करना शुरू भी कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य को रोगमुक्त, एनीमिया मुक्त, नशा मुक्त कराने के व्यापक स्तर पर प्रयास कर रही है। सरकार ने हाल ही ई-सिगरेट पर पाबंदी लगाई है। सरकार प्रत्येक वह काम कर रही है, जो आमजन की बेहतर सेहत से जुड़ा हो।  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने लोगों का फीडबैक जानने के लिए 'माय अस्पताल' नाम से एप भी शुरू किया है, जिससे अस्पताल आने वाले हर मरीज का फीडबैक लेकर उसकी संतुष्टि का स्तर पता किया जाता है। इस एप से अब तक 171 चिकित्सा संस्थान जोड़े जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने गुजरात की एक संस्था से भी एमओयू किया है, जिसमें 'दिल विदाउट बिल' के तहत 1 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क इलाज हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार हर मरीज को अच्छे व्यवहार, स्वच्छ वातावरण और सभी तरह की मेडिकल सुविधाएं मिलने जैसा माहौल बनाने का काम करेगी। डॉ. शर्मा ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम के तहत झुंझुनू जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र-इस्लामपुर को 86.7 प्रतिशत प्राप्त करने पुरस्कृत किया है। इसी प्रकार जिला चित्तौडग़ढ द्वारा 91 प्रतिशत, बांसवाड़ा के पीएचसी-सल्लोपाट द्वारा 87.7 प्रतिशत, जिला अस्पताल हनुमानगढ़ द्वारा 81 प्रतिशत, भीलवाड़ा की पीएचसी-सिंगोली द्वारा 92.6 प्रतिशत एवं जयपुर की यूपीएचसी-देवीनगर द्वारा 93.8 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर टीम को उनके बेहतरीन कार्य के लिए सम्मानित किया गया है।    

केंद्रीय मिशन निदेशक एनएचएम मनोज झालानी ने कहा कि राजस्थान प्रोग्रेसिव स्टेट है और पिछले सालों की तुलना में यहां स्वास्थ्य की दृष्टि से खासा सुधार हुआ है लेकिन फिर भी और अधिक सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टाफ पूरी तरह प्रशिक्षित हो, आमजन के साथ अच्छा व्यवहार हो, रैफरल सुविधा मजबूत हो, सिटीजंस को एम्पावर किया जाए, पेशेंट केयर सेंटर बने, समुदाय को एंगेज किया जाए तो परिणाम और भी बेहतर आ सकते हैं। हालांकि यह मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य यदि राइट टू हैल्थ कानून पर काम कर रहा है तो उसमें मिनिमम क्वालिटी को भी जरूर शामिल करे। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर बदलाव होने लगेगा तो राज्य में गुणवत्ता युक्त सेवाएं दे सकेंगे।  मिशन निदेशक एनएचएम समित शर्मा ने पिछले दिनों में 56 चिकित्सा संस्थानों पर स्वयं के द्वारा किए दौरों के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान अस्पतालों में पाई खूबियों और खामियों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि कमियां हर जगह, हर संस्थान में होती हैं लेकिन बदलाव कभी भी कहीं से भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि बदलाव की शुरूआत आपके जरिए होती है तो इससे आपका जीवन भी बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स को धरती का भगवान कहा जाता है, ?से में आमजन की उम्मीदें भी उनके कहीं अधिक होती हैं। ऐसे में सभी डॉक्टर्स अपनी भूमिका समझें समय पर अस्पताल आएं, मरीजों से अच्छा व्यवहार करें और उन्हें गुणवत्ता चिकित्सा उपलब्ध कराने का हरसंभव कोशिश करें।     इस अवसर पर अतिरिक्त मिशन निदेशक एसएल कुमावत, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. वी.के.माथुर, निदेशक आरसीएच डॉ. श्रीराम मीणा, यूएनएफपीए के डॉ. सुनील थॉमस  एवं चिकित्सा विभाग के सभी संयुक्त निदेशक, सीएमएचओ, डिप्टी सीएमएचओ, पीएमओ, आरसीएचओ, एनएचएम व एनयूएचएम के सभी जिलों में कार्यरत सलाहकार व प्रबंधकों ने हिस्सा लिया।

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