बाल श्रम के उन्मूलन के लिए स्वयंसेवी संस्थाएं आगे आएं- मुख्यमंत्री

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जयपुर, बुधवार, 12 जून 2019। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में बाल श्रम का उन्मूलन हो। इस दिशा में स्वयंसेवी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बालकों को श्रम कार्यों में लगाया जाना उनके साथ अन्याय है। जिस देश या प्रदेश में बालक शिक्षा प्राप्त करने के बजाय मजदूरी करें, उसका भविष्य अच्छा नहीं हो सकता। गहलोत बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर अंतरराष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम से मुक्त होकर शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल श्रम की समस्या का समाधान सबके सहयोग से ही सम्भव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा और आगे बढऩे के अच्छे अवसर मिले ताकि हमारे प्रदेश का भविष्य बेहतर बने।

उन्होंने कहा कि इसी भावना से मैंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल में संदेश दिया था कि पानी बचाओ, बिजली बचाओ और सबको पढ़ाओ। गहलोत ने इस अवसर पर अपना बाल विवाह रुकवाकर शिक्षा प्राप्त करने वाली बालिकाओं प्रीति वर्मा, शमा परवीन, गायत्री महावर, सुनीता सैनी, सविता राजवंशी एवं सोना बैरवा को पिंकसिटी साइकिल रिक्शा चालक संस्था की ओर से सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने बाल श्रम से मुक्त होकर शिक्षा ग्रहण कर रही खुशबू, कल्याणी एवं तनु को भी पुरुस्कृत किया।

मुख्यमंत्री ने बाल विशेषज्ञ गोविंद बेनीवाल की पुस्तक 'शोषण से शिक्षा की ओर बढ़ते कदम' का विमोचन किया एवं पिंकसिटी साइकिल रिक्शा चालक संस्था के बालश्रम मुक्त राजस्थान अभियान के पोस्टर पर हस्ताक्षर कर अभियान का शुभारम्भ किया। पिंकसिटी साइकिल रिक्शा चालक संस्था के सचिव विपिन तिवाड़ी ने बताया कि 2 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में करीब 10 लाख लोगों के हस्ताक्षर करवाए जाएंगे। इस अवसर पर विधायक महादेव सिंह खण्डेला, पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रयासों से बाल श्रम से मुक्त होकर शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चे उपस्थित थे। 

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